Didwana News : राजस्थान के डीडवाना के कुचामन सिटी में मुस्लिम परिवार सालों से हाथों से राखी बना रहे हैं, जिनकी डिमांड सिर्फ राजस्थान ही नहीं बल्कि यूपी-एमपी- हरियाणा में भी है.
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रक्षाबंधन, एक ऐसा पर्व जो भाई-बहन के रिश्ते को न सिर्फ मजबूत करता है, बल्कि समाज को भी आपसी प्रेम और सौहार्द का संदेश देता है. आगामी 9 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार देशभर में हर्षोल्लास से मनाया जाएगा. इस पर्व की तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं. राखियों के बाजार सज चुके हैं और कारीगर अपने हुनर में डूबे हुए हैं.
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राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के कुचामन सिटी की राखियाँ देशभर में भाई-बहन के रिश्ते की डोर को और भी पक्की बना रही हैं. अद्भुत बात ये है कि इन राखियों को बनाने वाले ज़्यादातर कारीगर मुस्लिम परिवारों से हैं, जो पूरे समर्पण और प्रेम से अपने हिन्दू भाइयों के लिए राखियाँ तैयार करते हैं.
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कुचामन सिटी के मोहल्ला लुहारान और आसपास के इलाकों में 120 से ज्यादा मुस्लिम परिवार बीते कई दशकों से राखी निर्माण के कार्य में जुटे हैं. यहाँ की महिलाएँ और पुरुष पारंपरिक तरीके से, हाथों से रंग–बिरंगी राखियाँ तैयार करते हैं, जो राजस्थान से लेकर गुजरात, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा जैसे राज्यों में भी भेजी जाती हैं.
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इन कारीगरों का कहना है कि जब वे अपनी बनाई हुई राखी को किसी भाई की कलाई पर बंधा देखते हैं, तो उन्हें ऐसा लगता है मानो वे भी इस पवित्र रिश्ते का हिस्सा बन गए हों. कुचामन की राखियों की पहचान अब एक सीमित क्षेत्र तक नहीं रही. यहां के कारीगरों द्वारा बनाई गई राखियाँ अपने डिज़ाइन, रंग और गुणवत्ता के कारण अब देशभर में लोकप्रिय हो चुकी हैं.
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यह कार्य उनके लिए रोजगार का बड़ा साधन भी है. कारीगरों का कहना है कि यदि सरकार इस पारंपरिक कुटीर उद्योग को प्रोत्साहन और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए, तो यह उद्योग और भी आगे बढ़ सकता है. मशीनों के इस दौर में हस्तशिल्प की पहचान बनाए रखना भी एक बड़ी बात है. राखी बनाने वाले कारीगरों की मांग है कि उनके इस उद्योग को और बढ़ावा मिले ताकि उनकी मेहनत और हुनर की पहचान बनी रहे.
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रक्षाबंधन भले ही एक धार्मिक पर्व हो, लेकिन कुचामन सिटी में यह पर्व सांप्रदायिक सौहार्द का भी प्रतीक बन चुका है. भाई–बहन के इस रिश्ते को मज़बूत करने वाली राखी जब किसी हिन्दू भाई की कलाई पर बंधती है, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि उसके हाथ में सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि भाईचारे की मिसाल भी बंधी होती है.
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कुचामन के ये मुस्लिम परिवार राखी बनाकर सिर्फ रोज़गार नहीं कमाते, बल्कि समाज को एकता और प्रेम का संदेश भी देते हैं. यहाँ हर धागा, हर मोती, हर डिज़ाइन सिर्फ कला नहीं है—यह दो दिलों को जोड़ने वाली डोर है और यही डोर आज के दौर में भारत की असली पहचान बन सकती है.