Diggi Kalyan Yatra: कल्याणजी डिग्गीपुरी लक्खी पदयात्रा में शहर और आसपास के गांवों तथा ढाणियों से करीब 500 से ज्यादा पदयात्राएं ताड़केश्वर महादेव मंदिर पहुंचेंगी. यहां भगवान शिव के दर्शन करने के बाद ये पदयात्राएं अपने गंतव्य की ओर रवाना होंगी.
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जयपुर से लगभग 90 किमी दूर टोंक जिले में स्थित विश्वविख्यात डिग्गीपुरी कल्याणजी मंदिर के लिए 60वीं लक्खी पदयात्रा गुरुवार को ताड़केश्वर महादेव मंदिर से शुरू होगी. इस पदयात्रा के लिए शहर और आसपास के गांवों से 500 से अधिक पदयात्री ताड़केश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर दर्शन करेंगे और फिर डिग्गीपुरी के लिए रवाना होंगे.
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पदयात्रा के लिए मुख्य केसरिया निशान-ध्वज की विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी और संत-महंत सहित कई राजनीतिक शख्सियतें इस यात्रा को रवाना करेंगी. पदयात्रा चार अगस्त को डिग्गी पहुंचेगी, जहां कल्याणधणी का गंगोत्री के जल से अभिषेक किया जाएगा.
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इस बार की पदयात्रा में भक्तों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि तेज बारिश के कारण रास्ते में जगह-जगह क्षतिग्रस्त सड़कों से परेशानी हो सकती है. इसके बावजूद, भक्तों की आस्था और उत्साह बरकरार है. अनुमान के मुताबिक, जयपुर जिले से ही लगभग तीन लाख लोग इस पदयात्रा में शामिल होंगे, जो अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ डिग्गीपुरी कल्याणजी मंदिर तक पहुंचेंगे.
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चौड़ा रास्ता, टोंक रोड और जेएलएन मार्ग पर जगह-जगह भंडारे के स्टॉल्स लगने शुरू हो गए हैं, जो पदयात्रियों के लिए विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट पकवान परोसेंगे. लगभग 1500 से अधिक स्टॉल्स पर पूरी-सब्जी, समोसा, बर्गर, आइसक्रीम और फल जैसे व्यंजन उपलब्ध होंगे.
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खास बात यह है कि सभी भंडारे पूरी तरह से प्लास्टिक मुक्त रहेंगे. इसके अलावा, राधा-कृष्ण और शिव-पार्वती के स्वांग भी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए जाएंगे. भक्त "बाजे छै नौबत बाजा हारा डिग्गीपुरी का राजा…" जैसे भजनों पर नृत्य करते हुए अपनी भक्ति का इजहार करेंगे.
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दसवीं शताब्दी में बना कल्याणजी मंदिर अपनी अनूठी मान्यताओं और ऐतिहासिक महत्व के कारण विश्व प्रसिद्ध है. संवत् 1584 यानी वर्ष 1527 में मेवाड़ के तत्कालीन राणा संग्राम सिंह के शासनकाल में इस मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ था.
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मंदिर में स्थापित कल्याणजी की सफेद संगमरमर की मूर्ति अत्यंत अद्वितीय है. इस मंदिर की स्थापना से जुड़ी कई रोचक कथाएं हैं, जिनमें राजा डिग्व की कथा प्रमुख है, जिन्हें भगवान विष्णु की कृपा से कुष्ठ रोग से मुक्ति मिली थी. डिग्गी में रहने वाले गुर्जर गौड़ वंश के पंडित इस मंदिर की सेवा-पूजा करते हैं और इसे एक पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में प्रतिष्ठित करते हैं.