Rajasthan News: राजस्थान के बालोतरा जिले की पचपदरा झील अपनी पारंपरिक नमक उत्पादन तकनीक के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. यहां खारवाल जाति के लोग बिना मशीन और केमिकल के 'मोरली झाड़ी' की मदद से नमक बनाते हैं.
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white gold of desert
राजस्थान के थार मरुस्थल में पचपदरा झील अपनी अनूठी नमक उत्पादन परंपरा के लिए पूरे देश में पहचना रखती है. बालोतरा जिले में यह झील जलस्रोत होने के साथ यहां तैयार होने वाला नमक अपनी शुद्धता और स्वाद के लिए पूरे भारत में फेमस है.
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इस आधुनिक युग में जहां नमक उत्पादन बड़े-बड़े कारखानों और मशीनों की जरूरत लगती है. वहीं, पचपदरा में आज भी प्रकृति और परंपरा के सहारे नमक बनाया जाता है.
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इस पूरे प्रक्रिया में सबसे खास भूमिका 'मोरली झाड़ी' निभाती है, जो नमक निर्माण की मुख्य आधार माना जाता है. इस पारंपरिक तरीके को देखने के लिए लोग दूर-दूर से यहां लोग आते हैं.
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पचपदरा झील की सबसे बड़ी खासियत इसकी रासायनिक संरचना है. यहां मिलने वाले नमक में लगभग 98 प्रतिशत सोडियम क्लोराइड पाया जाता है, जो इसे बेहद शुद्ध बनाता है.
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इसी वजह से यहां का नमक स्वाद और गुणवत्ता दोनों के लिहाज से खास है. इसके चलते लोग इसे रेगिस्तान का 'सफेद सोना भी कहते हैं. यहां नमक उत्पादन का काम मुख्य रूप से खारवाल जाति के लोग करते हैं, जो पीढ़ियों से इससे जुड़े हुए हैं.
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ये लोग झील के आसपास छोटे-छोटे गड्ढे और क्यारियां बनाते हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'कोशिया' कहा जाता है. इन्हीं कोशियों में खारे पानी को इकट्ठा कर नमक तैयार करने का काम शुरू होता है.
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नमक बनाने की सबसे अनोखी प्रक्रिया मोरली झाड़ी के इस्तेमाल से जुड़ी हुई है. खारवाल समुदाय के लोग झाड़ी की टहनियों को खारे पानी से भरी क्यारियों में डालते हैं और फिर तेज धूप और गर्म हवाओं से जब पानी धीरे-धीरे सूखता है तब पानी में घुला नमक झाड़ी की टहनियों और पत्तियों के चारों ओर जम जाता है. वहीं, कुछ दिनों बाद झाड़ी पर सफेद चमकदार नमक के स्फटिक बनने लगते हैं. ये स्फटिक देखने में बेहद सुंदर लगती है. इनको हाथों से अलग कर इकट्ठा किया जाता है. ये नमक शुद्ध होता है क्योंकि इसमें किसी तरह का कोई केमिकल नहीं होता है.