Do You Know: यह एक दिलचस्प तुलना है, और विभिन्न रिपोर्टों और वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, हाँ, चंबल नदी का पानी गंगा नदी के पानी की तुलना में काफी हद तक साफ़ और कम प्रदूषित है.
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चंबल नदी की सफाई के पीछे कई कारण हैं. सबसे पहले, चंबल नदी अपने अधिकांश बहाव क्षेत्र में कम आबादी वाले क्षेत्रों और बीहड़ों से होकर गुजरती है, जिससे इसमें बड़े शहरों से निकलने वाला औद्योगिक कचरा और सीवेज सीधे और भारी मात्रा में नहीं मिलता है.
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इसके अलावा, चंबल नदी का एक बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के रूप में संरक्षित है, जो घड़ियाल, मगरमच्छ, और दुर्लभ गंगा नदी डॉल्फिन जैसे जलीय जीवों का घर है. इस संरक्षण के कारण प्रदूषण को नियंत्रित करने पर ज़ोर दिया जाता है, जिससे नदी का पानी साफ़ रहता है.
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धार्मिक कारण कथित अभिशाप
कुछ स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, चंबल नदी को महाभारत काल से "अभिशप्त" माना जाता था, जिसके कारण लोग सदियों तक इस नदी के पास बड़ी बस्तियाँ बनाने या इसके पानी को घरेलू उपयोग में लेने से बचते रहे. इस सामाजिक बहिष्कार ने नदी को प्रदूषण से बचाए रखा.
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गंगा नदी में प्रदूषण के कई कारण हैं. गंगा नदी भारत के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार से होकर गुजरती है, जिससे इसमें बड़े शहरों जैसे कानपुर, वाराणसी, और पटना का भारी मात्रा में अनुपचारित सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट सीधे नदी में गिरता है.
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इससे इसकी जल गुणवत्ता कई स्थानों पर बहुत खराब हो गई है. विभिन्न सरकारी एजेंसियों की रिपोर्ट में भी गंगा के कई हिस्सों में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड और फीकल कॉलीफॉर्म का स्तर सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक पाया गया है, जो इसके प्रदूषण की गंभीरता को दर्शाता है.
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जहाँ गंगा नदी अपने स्व-शुद्धिकरण (Self-purifying) के अद्भुत गुणों (बैक्टीरियोफेज वायरस और उच्च ऑक्सीजन स्तर के कारण) के लिए जानी जाती है, खासकर अपने ऊपरी हिस्सों (गोमुख से हरिद्वार/ऋषिकेश) में, वहीं शहरी क्षेत्रों से गुजरने के बाद इसमें प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है. इसके विपरीत, चंबल नदी अपने संरक्षित और कम प्रदूषित बहाव क्षेत्र के कारण, जलीय जीवन को बनाए रखने की दृष्टि से, अधिक शुद्ध मानी जाती है.