घरों में जब देवर भाभी को छेड़ता है, तो भाभी प्यार से डांटती है और एक खास शब्द बोलती है. शादियों के गीतों में भी ये नाम गूंजता है – “लय री भाभी, नेग मांगे रे...”. लोकगीतों में, रील्स में, यूट्यूब पर राजस्थानी कॉमेडी में ये शब्द बार-बार आता है. मारवाड़ हो, शेखावाटी हो या मेवाड़ – हर जगह देवर-भाभी की ये ठिठोली एक जैसी है, लेकिन नाम सुनकर मुस्कान आ जाती है.