Jahangir: भारत पर मुगलों ने लगभग 331 साल तक राज किया. इस दौरान उन्होंने भारत पर कई तरह के अत्याचार किए. लेकिन कुछ मुगल कट्टरपंथी रहे तो वहीं कुछ मुगल शासकों ने अच्छे कार्य भी किए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कौन-सा मुगल शासक सबसे ज्यादा नशे का आदि था.
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गुलाब का अर्क
मुगल काल में विशेष रूप से नूरजहां के समय पुष्कर के गुलाबों का महत्व और बढ़ गया था. कहा जाता है कि नूरजहां को गुलाबों से बेहद लगाव था और उन्हीं के कहने पर गुलाब की पंखुड़ियों से अर्क निकालने की विधि अपनाई गई.
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जहांगीर की थी पत्नी
आपको बता दें कि नूरजहां मुगल शासक जहांगीर की पत्नी थी. लेकिन मुगल सम्राट जहांगीर का जीवन सिर्फ सत्ता और ऐश्वर्य तक सीमित नहीं था, बल्कि उसकी सबसे बड़ी पहचान उसका नशे का शौक भी था. इतिहास में यह दर्ज है कि जहांगीर हर वक्त नशे में डूबा रहता था. उसे तंबाकू बिल्कुल पसंद नहीं थी, लेकिन शराब और अफीम का नशा उसकी दिनचर्या का अहम हिस्सा था.
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अपनी आत्मकथा में किया जिक्र
जहांगीर ने अपनी आत्मकथा तुज़ुक-ए-जहांगीरी (तुबुक-ए-जहांगीरी) में खुद लिखा है कि वह एक दिन में करीब 20 प्याला शराब पीता था. इनमें से 14 प्याले दिन में और 6 प्याले रात को पिए जाते थे. उसके दरबार में शराब के लिए खास इंतजाम होता था. शराब को ठंडा रखने के लिए बर्फ कश्मीर से मंगाई जाती थी. यह दर्शाता है कि नशे के लिए उसका लगाव किस हद तक था.
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अफीम का नशा
समय बीतने के साथ शराब की आदत ने उसे शारीरिक रूप से कमजोर कर दिया. कहा जाता है कि बाद में उसने शराब की मात्रा कम करनी शुरू कर दी, लेकिन इसकी जगह अफीम का नशा अपना लिया. अफीम की लत भी इतनी गहरी थी कि वह बिना इसके रह नहीं पाता था. धीरे-धीरे अफीम का असर उसके स्वास्थ्य पर पड़ने लगा और उसे अस्थमा की बीमारी हो गई.
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नशा ही बना उसकी मौत का कारण
इतिहासकारों का मानना है कि शराब और अफीम, दोनों की आदतें ही जहांगीर की सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुईं. उसका स्वास्थ्य बिगड़ता गया और अंततः यही उसकी मृत्यु का कारण बना.
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नशे की लत है चर्चा का विषय
जहांगीर कला, स्थापत्य और प्रकृति प्रेमी शासक माना जाता है, लेकिन उसकी छवि पर हमेशा उसके नशे की आदतें हावी रहीं. तंबाकू से दूरी रखने वाला यह शासक शराब और अफीम का इतना दीवाना था कि उसका नाम सुनते ही उसके शासनकाल से ज्यादा उसकी नशे की लत चर्चा में आ जाती है.
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