Dungarpur News : ससरन की नाल नदी को पार कर 2.5 किमी तक पैदल चलकर स्कूल जाते है बच्चे

Dungarpur News : डूंगरपुर जिले के ससरन की नाल में रहने वाले बच्चों को स्कूल जाने के लिए 2.5 किमी तक नदी के पानी में से गुजरना पड़ता है. नदी में सालभर घुटनों से नीचे तक पानी बहता है, जबकि बारिश में 4-5 फीट तक पानी भर जाता है. इस नदी को पार करने के बाद पहाड़ी और खेतों के बीच कंटीला रास्ता आता है, जो बच्चों के लिए और भी खतरनाक है. नदी में जहरीले जानवरों का डर भी सताता है. बावजूद इसके बच्चे रोजाना इसी नदी से होकर पढ़ने जाते है.

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Dungarpur News : डूंगरपुर जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर झोंथरी पंचायत समिति के ग्राम पंचायत रेटा के कुंडली फला में ससरन की नाल है. यहां करीब बिखरी हुई 500 से ज्यादा की आबादी है. ससरन की नाल नदी के एक तरफ पहाड़ियों ओर खेतो के बीच 5वी तक का प्राइमरी स्कूल है. पांचवीं पास करने के बाद बच्चों को पढ़ने के लिए ढाई किलोमीटर दूर कुंडली अपर प्राइमरी स्कूल जाना पड़ता है. ससरन की नाल प्राइमरी स्कूल जाने के लिए ढाई किमी नदी एक मात्र रास्ता है. राजस्थान से गुजरात तक जाने वाली ये नदी सालभर बहती है. बारिश में नदी का पानी पूरे उफान पर बहता है. बारिश के बाद ये अपनी घुटनों से नीचे बहता रहता है. नदी में नुकीले पत्थर, ऊबड़ खाबड़ ओर जहरीले जानवरों का डर हमेशा रहता हुआ. इसी के बीच से होकर रोजाना 7 से 8 बच्चे प्राइमरी स्कूल ओर 10 से 15 बच्चे दूसरे छोर पर अपर प्राइमरी स्कूल पढ़ने के लिए जाने को मजबूर है.
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ससरन की नाल के रहने वाले निलेश ओर मनीषा कुंडली अपर प्राइमरी स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ते है. उनके साथ ही 10 से 15 दूसरे बच्चे भी रोजाना नदी के बीच होकर पढ़ने आते जाते है. बच्चे बताते है कि हम तो रोज ही इस नदी से होकर ही पढ़ने स्कूल जाते है. नदी में घुटनों से नीचे तक पानी था. कही 2 तो कही 3 फिट ओर उससे ज्यादा पानी था. बच्चे बताते है कि नदी में कई बार उनके बस्ते भीग जाते है. जिससे किताबें भी खराब हो जाती है. कपड़े तो रोजाना भीगते है. कई बार कीचड़ वाले हो जाते है. बारिश में जब नदी पूरी भर जाती है तब स्कूल जाने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है. तब वे भी स्कूल नहीं जाते है. ऐसे में बारिश के दिनों में अक्सर उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है.