Godawan Bird: गोडावण, राजस्थान का राज्य पक्षी और विश्व का सबसे भारी उड़ने वाला पक्षी, विलुप्ति के कगार पर है. IUCN की 'क्रिटिकली एंडेंजर्ड' सूची में शामिल इस प्रजाति की संख्या भारत में अब केवल 100-150 रह गई है. इसके संरक्षण के लिए भारत सरकार, राजस्थान वन विभाग और वन्यजीव संस्थान (WII) आधुनिक तकनीकों का सहारा ले रहे हैं.
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जैसलमेर के सुदासरी ब्रीडिंग सेंटर में कृत्रिम गर्भाधान (AI) से दो स्वस्थ चूजे पैदा किए गए, जिससे भारत इस तकनीक को अपनाने वाला पहला देश बन गया. यह प्रक्रिया अबू धाबी के हुबारा बस्टर्ड प्रोजेक्ट से प्रेरित है और 2026 से रामदेवरा सेंटर में बड़े पैमाने पर लागू होगी. इसके अलावा, कैप्टिव ब्रीडिंग और कृत्रिम ऊष्मायन से 16 चूजे पाले गए हैं, जिन्हें नियंत्रित तापमान (37.5°C) में सेने के बाद रिवाइल्डिंग के जरिए जंगल में छोड़ा जाता है.
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बिजली लाइनों से टकराव रोकने के लिए गुजरात-राजस्थान में 50,000 से अधिक बर्ड डायवर्टर्स लगाए गए हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में केबल्स को भूमिगत किया जा रहा है.
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डेजर्ट नेशनल पार्क में घासभूमि बहाली, जीपीएस ट्रैकिंग, ड्रोन सर्वे और एंटी-पोचिंग टीमों के जरिए आवास संरक्षण और निगरानी को मजबूत किया जा रहा है.
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'प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' और 'मेरी उड़ान न रोकें' जैसी पहलों में स्थानीय समुदायों को शामिल कर जागरूकता बढ़ाई जा रही है.
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2018 से 'हैबिटेट इम्प्रूवमेंट एंड कंजर्वेशन ब्रीडिंग' प्रोजेक्ट पर 33.85 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, और 2024-2029 के लिए 56 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं.
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सोलर फार्म्स का विस्तार चुनौती बना हुआ है, लेकिन सरकारी-समुदायिक सहयोग से गोडावण को बचाने की उम्मीद है. यह प्रयास भारत की जैव-विविधता को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.