Camels Eat Cactus: रेगिस्तान का जहाज! कांटेदार कैक्टस और टहनियों को आसानी से चबा लेता है. इसकी अनोखी बनावट इसे मरुस्थल में जीवित रखती है.
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ऊंट को रेगिस्तान का जहाज कहा जाता है, क्योंकि यह मरुस्थलीय परिस्थितियों में सीमित संसाधनों के बावजूद जीवित रहने की अद्भुत क्षमता रखता है. रेगिस्तान में खाने-पीने की चीजें कम होती हैं, फिर भी ऊंट कांटेदार टहनियों और कैक्टस जैसी कंटीली वनस्पतियों को आसानी से चबा लेता है.
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हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल एक 15 सेकेंड के वीडियो में ऊंट को शांति से कांटेदार टहनी खाते देखा गया, जिसने लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया. कई लोग सोचते हैं कि नुकीले कांटे ऊंट के मुंह या गले को नुकसान क्यों नहीं पहुंचाते.
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इसका जवाब ऊंट के मुंह की खास बनावट में छिपा है. ऊंट के मुंह में शंकु के आकार की पपीली होती हैं, जो कांटों को पकड़ने और चबाने में मदद करती हैं. ये पपीली इतनी सख्त होती हैं कि कांटों से खरोंच या चोट नहीं लगती.
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साथ ही, ऊंट की जीभ और मांसपेशियां इन पपीली के साथ मिलकर कठोर भोजन को पचाने में सहायता करती हैं.
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रेगिस्तान में पानी की कमी के कारण ऊंट कैक्टस खाते हैं, क्योंकि इनमें पानी की मात्रा अधिक होती है.
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ऊंट का पाचन तंत्र भी कांटेदार भोजन को पचाने के लिए अनुकूलित है. एक गलतफहमी कि ऊंट के मसूड़ों में पत्थर होते हैं, गलत है; यह पपीली ही उनकी ताकत है.
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ऊंट की यह खासियत उसे मरुस्थल में जीवित रहने में सक्षम बनाती है, और वह जरूरत पड़ने पर 100 लीटर से अधिक पानी भी पी सकता है. अगली बार ऊंट को कांटे खाते देखकर उसकी इस अनोखी शारीरिक बनावट को जरूर याद करें.