Jaipur News: राजस्थान के जयपुर के चौमूं में रहने वाले 19 वर्षीय छात्र रोहित शर्मा का नाम एक बार फिर से चर्चा में है. भले ही आज वो जिंदा नहीं है लेकिन उसका लिवर आज भी काम कर रहा है. जानें पूरी कहानी.
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पंद्रह दिन पहले सड़क दुर्घटना में ब्रेन डेड हुए चौमूं के राजावास निवासी 19 वर्षीय छात्र रोहित शर्मा का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है.
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भले ही रोहित अब इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उसका लिवर आज भी जयपुर के एक 47 वर्षीय व्यक्ति के शरीर में काम कर रहा है. दरअसल, ब्रेन डेड घोषित होने के बाद रोहित के परिजनों ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए अंगदान का बड़ा फैसला लिया.
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रोहित का लिवर उस मरीज को ट्रांसप्लांट किया गया, जो बीते दो सालों से एसएमएस अस्पताल के HPB सर्जरी विभाग में इलाज करवा रहा था. मरीज का लिवर पूरी तरह खराब हो चुका था और उन्हें डॉक्टर दिनेश कुमार भारती की टीम ने ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी.
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मरीज ने दो साल पहले SOTTO में पंजीकरण करवाया था और 31 अगस्त को उनका नंबर आया. SMS अस्पताल में सफल कैडेवर लिवर ट्रांसप्लांट किया गया और अब वह मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुका है.
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इस जटिल सर्जरी को डॉ. दिनेश भारती, डॉ. अशुतोष पंचोली, डॉ. राजत जांगिड़, डॉ. सीएस चटर्जी, डॉ. पूनम कालरा, डॉ. ममता शर्मा और डॉ. योगेश मोदी की टीम ने अंजाम दिया. सीटीवीएस टीम में डॉ. अनिल शर्मा, डॉ. सुनील दीक्षित और डॉ. मोहित शर्मा शामिल रहे. वहीं, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर रामप्रसाद व लीलम मीणा का विशेष सहयोग रहा.
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एसएमएस अस्पताल के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी , एमएस डॉ. सुशील भट्टी समेत चिकित्सकों का समर्थन भी इस सफलता में अहम रहा. रोहित के परिवार ने यह साबित किया कि अंगदान वास्तव में 'महादान' है, जो किसी की मृत्यु को किसी और की नई जिंदगी में बदल सकता है.