Chhath Puja Jaipur: जयपुर में डाला छठ महापर्व उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हुआ. बादलों और बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं ने 36 घंटे का निर्जला व्रत रख भक्ति की मिसाल पेश की.
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छठ महापर्व
जयपुर में सूर्य उपासना का चार दिवसीय डाला छठ महापर्व उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ विधिवत संपन्न हो गया. हालांकि आसमान में घने बादल छाए रहे और हल्की बारिश की बूंदों के बीच सूर्यदेव के दर्शन दुर्लभ रहे, लेकिन 36 घंटे का निर्जला-निराहार व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास तनिक भी कम नहीं हुआ.
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बादल और बारिश भी न डिगा सकी श्रद्धा
भोर होते ही गलता तीर्थ, आमेर मावठा और शहर के विभिन्न घाटों पर श्रद्धा का ज्वार उमड़ पड़ा. सैकड़ों श्रद्धालु कमर तक जल में खड़े होकर उगते सूर्य की प्रतीक्षा में डटे रहे. यह दृश्य व्रतियों की अखंड आस्था को दर्शाता था.
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मुख्य केंद्र
गलता तीर्थ, आमेर मावठा और सागर में छठी मैया के जयकारे और पारंपरिक लोकगीत गूंज उठे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया.
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शहर में व्यवस्था
शास्त्री नगर, किशनबाग, हसनपुरा, प्रताप नगर, मालवीय नगर सहित कई हिस्सों में श्रद्धालुओं ने अर्घ्य देने के लिए कृत्रिम तालाब बनाए थे.
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मावठा झील पर पारंपरिक समापन
आमेर क्षेत्र में, ऐतिहासिक मावठा झील के तट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में साज-सज्जा के साथ पूजा-अर्चना की और सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया.
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सूर्योदय के समय
36 घंटे का कठिन उपवास पूर्ण करने वाले छठ व्रतियों ने सेव, केला, ठेकुआ, कसार और गन्ने से अर्घ्य दिया. सूरज की लालिमा भले ही बादलों के पीछे थी, लेकिन आस्था की किरणें हर श्रद्धालु के चेहरे पर साफ झलक रही थीं.
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छठ महापर्व
छठी मैया के गीतों की गूंज और उत्साह के बीच पूजा सम्पन्न हुई. इसके बाद पारंपरिक प्रसाद—ठेकुआ—का वितरण किया गया. भीगते हुए भी लोगों ने मुस्कुराते हुए कहा कि सूर्यदेव नहीं दिखे, पर हमारी आस्था तो चमक उठी. इस महापर्व के समापन के साथ व्रतियों ने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की.