Rajasthan news: जैसलमेर के रामदेवरा में राम सरोवर तालाब पर देश भर से आए हज़ारों भाट परिवारों ने अस्थाई डेरा डाला है. ये परिवार आधुनिकता से दूर, वर्षों पुरानी परंपरा निभाते हुए खुले आसमान के नीचे रहते हैं. इनका पहनावा और सामाजिक नियम पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं.
1/7
Bhat Family Ramdevra
जैसलमेर में धार्मिक आस्था का केंद्र रामदेवरा इन दिनों एक अद्भुत नजारा पेश कर रहा है. यहां के राम सरोवर तालाब और मुख्य मेला चौक सहित अन्य खुले स्थानों पर देश भर से आए हज़ारों भाट परिवारों ने अपना अस्थाई डेरा डाल लिया है, जिससे यहां पूरा का पूरा एक अस्थाई गांव सा बस गया है.
2/7
Bhat Family Ramdevra
ये भाट परिवार हर साल कार्तिक माह में एक पखवाड़े (15 दिन) के लिए दिल्ली, सोजत, मारवाड़, अहमदाबाद और सूरत जैसे देश के अलग-अलग हिस्सों से यहां आते हैं.
3/7
Bhat Family Ramdevra
भाट परिवारों की जीवनशैली यहां आने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. आधुनिकता की चकाचौंध से दूर, ये लोग अपनी वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वाह करते हुए किसी धर्मशाला या होटल में रुकने के बजाय खुले आसमान के नीचे ही डेरा डालकर रहते हैं. चाहे आंधी हो, तूफान हो या बरसात, ये अपने स्थान से नहीं हटते और यहीं पर अपना पूरा जीवन यापन करते हैं.
4/7
Bhat Family Ramdevra
राम सरोवर तालाब के पास हज़ारों की संख्या में ये परिवार अपना खाना-पीना और सोना सब एक साथ करते हैं.
5/7
Bhat Family Ramdevra
इन परिवारों की महिलाओं का पारंपरिक पहनावा और उनकी बोली भी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह पूरा दृश्य काफी मनमोहक और कौतूहल भरा होता है.
6/7
Bhat Family Ramdevra
इस अस्थाई गांव में इनके सामाजिक नियम भी काफी सख्त हैं. यहां, भाट समाज के पंचों की उपस्थिति में ही इनके शादी-विवाह सहित अन्य सामाजिक कार्यों की रूपरेखा तय होती है, और सबके सामने तय किए गए नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है.
7/7
Bhat Family Ramdevra
परिवारों का कहना है कि वर्षों पूर्व उनके पूर्वज भी बाबा रामदेव की तपोभूमि पर खुले स्थान पर ही आकर रहा करते थे. उन्हें यह परंपरा काफी पसंद है और वे इसे आगे भी जारी रखेंगे. यह अस्थाई बस्ती रामदेवरा की आध्यात्मिक यात्रा को एक अनूठा सांस्कृतिक आयाम देती है.