Jodhpur News: जोधपुर का नया अक्षरधाम मंदिर आज लोकार्पित हुआ. यह भारत का तीसरा और दुनिया का पांचवां अक्षरधाम है, जो नागर शैली और इंटरलाकिंग पत्थर प्रणाली से बना है. यह 42 बीघा में फैला एक भव्य धार्मिक और पर्यटन स्थल है.
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स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर
आज राजस्थान के जोधपुर शहर में एक ऐतिहासिक दिन है, जहां स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर का भव्य लोकार्पण किया गया. पिछले 10 दिनों से चल रहा प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव आज सुबह 7 बजे के अनुष्ठान के साथ संपन्न हुआ. यह मंदिर न केवल एक धार्मिक केंद्र है, बल्कि वास्तुकला का भी एक अद्भुत नमूना है, जिसका लोकार्पण शाम 5 बजे कई गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में होगा.
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जोधपुर
जोधपुर का यह मंदिर अपनी भव्यता के साथ ही अपनी विशिष्ट पहचान के लिए भी जाना जाएगा. यह भारत में तीसरा और पूरी दुनिया में पांचवां अक्षरधाम मंदिर है. भारत में इसके पहले गांधीनगर और दिल्ली में ऐसे मंदिर स्थापित हैं, जबकि विदेशों में लंदन (ब्रिटेन) और अबू धाबी (खाड़ी देश) में दो अन्य मंदिर स्थित हैं, जिससे यह जोधपुर के लिए एक वैश्विक पहचान बन गया है.
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भव्य मंदिर
यह भव्य मंदिर शहर के सूरसागर क्षेत्र में, कालीबेरी इलाके में 42 बीघा भूमि पर फैला हुआ है. इसके निर्माण में सात साल का लंबा समय लगा और इसे 500 से अधिक अनुभवी शिल्पकारों ने तैयार किया है, जो राजस्थान और अन्य क्षेत्रों से आए थे. इन शिल्पकारों की मेहनत और कला का परिणाम है यह अद्भुत मंदिर.
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वास्तुकला
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी वास्तुकला है. यह पूरी तरह से जोधपुर के पत्थरों से बना है और इसके निर्माण में 1,11,111 क्यूबिक फीट बलुआ पत्थर और संगमरमर का इस्तेमाल हुआ है. इसमें धातु, सीमेंट या गारे का बिल्कुल भी उपयोग नहीं किया गया है, बल्कि पत्थरों की इंटरलॉकिंग प्रणाली से इसे जोड़ा गया है.
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प्राचीन शैली
यह मंदिर नागर शैली में बना है, जो 10वीं से 13वीं शताब्दी के बीच राजस्थान और गुजरात में विकसित हुई वास्तुकला की एक प्राचीन शैली है. मंदिर में पांच मुख्य शिखर, एक विशाल गुंबद और 14 छोटे गुंबद हैं. इसका मुख्य हिस्सा 191 फीट लंबा, 181 फीट चौड़ा और 111 फीट ऊंचा है. इसकी 1100 फीट की चारदीवारी में बनी पत्थर की जालीदार दीवारें प्राकृतिक रूप से वातानुकूलन का काम करती हैं.
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पर्यटन स्थल
यह मंदिर सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि एक पूरा परिसर है, जिसमें 10 बीघा में फैला एक खूबसूरत बाग भी है. इस बाग में 500 पेड़ और 5500 पौधे लगे हैं, जो यहां आने वालों को शांति और सुकून का एहसास कराते हैं. दिल्ली के अक्षरधाम की तरह ही, यह भी एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगा.
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फोटोज
यहां पर लगी फोटोज AI जनरेटेड है. Zee Rajasthan इसकी पुष्टि नहीं करता है.