Vijay Diwas 2025 Celebration: आज 16 दिसंबर, विजय दिवस. ठीक 53 साल पहले आज ही के दिन भारतीय सेना ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में ऐतिहासिक जीत हासिल की थी. इस युद्ध ने न केवल पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी, बल्कि पूर्वी पाकिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र बांग्लादेश के रूप में जन्म दिया.
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Vijay Diwas 2025 Celebration
दुनिया के युद्ध इतिहास में यह सबसे बड़ा आत्मसमर्पण था, जब पाकिस्तानी सेना के 93,000 सैनिकों ने हथियार डाल दिए. यह जीत भारतीय सैनिकों के साहस, रणनीति और मानवीयता की मिसाल है.
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16 दिसंबर, कारगिल विजय दिवस. आज पूरा देश उन जांबाजों को याद कर रहा है जिन्होंने 1999 के युद्ध में दुश्मन को धूल चटाई.
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इनमें राजस्थान के सीकर जिले के दिगेंद्र कुमार का नाम सबसे ऊपर आता है. सीकर के झालरा गांव में 3 जुलाई 1969 को जन्मे दिगेंद्र आज 55 साल के हैं, जयपुर के वैशाली नगर में रहते हैं, लेकिन उनका जज्बा आज भी वैसा ही है.
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रिटायरमेंट के बाद भी वे कहते हैं, "अगर युद्ध हुआ तो मैं अभी भी बॉर्डर पर 4800 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराने को तैयार हूं." 1985 में 2 राजपूताना राइफल्स में भर्ती हुए दिगेंद्र 2005 में रिटायर हुए, लेकिन उनकी बहादुरी की कहानियां आज भी सेना में सुनाई जाती हैं.
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कारगिल युद्ध में तोलोलिंग की चोटी पर 13 जून 1999 की वो रात... दिगेंद्र अकेले दुश्मन की पोस्ट पर चढ़े. शरीर में पांच गोलियां लगीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. 48 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया. पाकिस्तानी मेजर अनवर खान का सिर चाकू से काटकर वे चोटी पर तिरंगा फहराने वाले पहले भारतीय बने. राष्ट्रपति केआर नारायणन ने उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया. दिगेंद्र की 'कारगिल कुटिया' में वो तलवार आज भी रखी है, जो उस रात काम आई थी.
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उससे पहले 1993 में कुपवाड़ा में उग्रवादी मजीद खान ने उनके कंपनी कमांडर वीरेंद्र तेवतिया को धमकी दी थी. दिगेंद्र गुस्से में पहाड़ी पर चढ़े, मजीद को मार गिराया और शव कंधे पर उठाकर कर्नल के सामने पटक दिया.
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इसके लिए उन्हें सेना मेडल मिला. सेना के बेस्ट कोमांडो कहे जाने वाले दिगेंद्र कहते हैं, "युद्ध लड़ने के लिए जवान होना जरूरी नहीं, हौसला और हुनर चाहिए."
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आज विजय दिवस पर दिगेंद्र जैसे जांबाजों को सलाम. सीकर का यह लाल युवाओं के लिए जीती-जागती मिसाल है. उनकी कहानी सुनकर गर्व होता है कि राजस्थान की मिट्टी ने ऐसे वीर पैदा किए. दिगेंद्र की वीरगाथा हर भारतीय को प्रेरित करती रहेगी. जय हिंद!