Khatu shyam Ji: आज के समय में बाबा श्याम के दर्शन करने के लिए हर रोज लाखों भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है. वर्तमान में बाबा श्याम के मंदिर का भव्य तरीके से निर्माण हो चुका है. देखें अनदेखी तस्वीरें.
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खाटू श्याम जी महाबली भीम के पोते और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक हैं. इनके शीश की पूजा खाटू गांव में होती है, जहां लाखों भक्तों की भारी भीड़ आती है.
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कहा जाता है कि 1027 ई. में रूपसिंह चौहान और उनकी पत्नी नर्मदा कंवर ने मूल मंदिर के गर्भ गृह की स्थापना की और बाबा श्याम की शीश स्थापित किया था. इसके बाद बरसों तक उन्होंने पूजा अर्चना की.
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कहते हैं कि बाबा श्याम का शीश स्थापित होते ही उनके दरबार में भक्तों का तांता लगने लगा था, जो आज भी जारी है. कहते हैं कि ये तस्वीर एक चित्रकार ने बनाई थी.
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धीरे-धीरे जैसे-जैसे खाटू श्याम बाबा जी की ख्याति बढ़ रही है वैसे-वैसे खाटूधाम का भी रूप बदल रहा है. वर्तमान समय में बाबा श्याम का अलौकिक श्रृंगार देखने को मिलता है.
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खाटू श्याम जी (बर्बरीक) ने अपनी माता से हारने वाले का साथ देने का वचन लिया था. महाभारत युद्ध के दौरान, भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक की परीक्षा ली और उन्होंने बर्बरीक से शीश दान मांगा और बर्बरीक ने शीश दान दे दिया.
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इससे खुश होकर श्री कृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में अपने ही नाम 'श्याम' से पूजे जाने का वरदान दिया था. इसी चलते उनको शीश की दानी, हारे के सहारे आदि नामों से जाना जाता है.
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कहते हैं कि खाटू श्याम जी जो भक्त सच्चे मन से मन्नत मांगते और सच्ची श्रद्धा और विश्वास रखते हैं, उनकी बाबा श्याम सारी प्रार्थना पूरी करते हैं. (डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी और लोगों द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.)