Khatu Shyam Ji: बाब श्याम का मंदिर राजस्थान के खाटू कस्बे में स्थित है. खाटू श्याम जी मंदिर में पांडव भीम के पोते और घटोत्कच्छ के बेटे बर्बरीक की विशेष पूजा की जाती है. यहां बाबा के भक्त निशान चढ़ाते हैं. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे ये निशान क्यों चढ़ाया जाता है.
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खाटू श्याम जी मंदिर में हर रोज भक्तों की भारी भीड़ दर्शन करने आती है, जिनमें से ज्यादातर श्रद्धालु अपने साथ खाटू श्याम का ध्वज लेकर आते हैं, जिसको निशान कहा जाता है.
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वहीं, खाटू श्याम जी मंदिर में निशान चढ़ाने की परंपरा बहुत पुराने समय से चली आ रही है, जो आज भी निभाई जा रही है. ऐसे में बाबा के दरबार में भक्त निशान चढ़ाते हैं.
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निशान को झंडा और ध्वज कहा जाता है. निशान को बाबा श्याम द्वारा दिए गए बलिदान और दान का प्रतीक माना जाता है क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण को उन्होंने धर्म की जीत के लिए अपना शीश दान दे दिया था.
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खाटू श्याम जी मंदिर चढ़ाने वाला निशान केसरिया, नारंगी और लाल रंग का होता है. साथ ही इस पर भगवान श्री कृष्ण और बाबा श्याम की फोटो और मोर पंख होते हैं.
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कहते हैं कि इस निशान को बाबा श्याम पर अर्पित करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. वहीं, कुछ लोग मनोकामना पूरी होने पर बाबा को निशान चढ़ाते हैं.
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खाटू श्याम जी शक्तिशाली पांडव भीम के पोते और घटोत्कच्छ के पुत्र हैं, जिनको महाभारत में बर्बरीक के नाम से जाना जाता है. खाटू श्याम जी की मां मोरवी हैं. बर्बरीक के पास अपार शक्ति और क्षमता थी, जिससे खुश होकर महादेव ने उन्हें तीन बाण दिए थे.
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एकादशी पर खाटू श्याम जी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ होती है. खासकर फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी पर. खाटू श्याम जी मंदिर में अर्जी लगाने का भी विधान है, जिसमें भक्त अपनी मनोकामनाएं लिखते हैं. (डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी और लोगों द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.)