Khatu Shyam Ji: राजस्थान के सीकर जिले में खाटू श्याम जी की भव्य मंदिर हैं, जिनकी महिमा हर रोज बढ़ती जा रही है. बाबा के दरबार में देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी उनके भक्त धोक लगाने आते हैं. साथ ही लोग इनको कुलदेवता के रूप में भी पूजते हैं, जानिए इसकी कहानी.
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वैसे तो खाटू श्याम जी मंदिर में भारत के सभी राज्यों से भक्त आते हैं लेकिन इनके सबसे अधिक श्रद्धालुओं की संख्या हरियाणा और राजस्थान से आते हैं क्योंकि इन दोनों ही जगह से बाबा श्याम का गहरा संबंध हैं.
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हरियाणा और राजस्थान से बाबा श्याम का ऐतिहासिक और धार्मिक संबंध जुड़ा हुआ है. खाटू श्याम जी का असली नाम बर्बरीक है, जिनकी कहानी महाभारत काल से है. बर्बरीक एक महान और बलवान योद्धा थे.
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कहानियों के मुताबिक, महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र से हुआ था. कहा जाता है कि बर्बरीक ने युद्ध में हिस्सा लेने के लिए कुरुक्षेत्र आते हुए चुलकाना धाम में आराम किया था.
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वहीं, चुलकाना धाम में बर्बरीक को भगवान श्रीकृष्ण मिले थे, जहां बर्बरीक ने उनको अपना शीश दान में दे दिया था. कहते हैं कि ये वहीं जगह है, जहां बर्बरीक को भगवान श्रीकृष्ण से कलियुग में श्याम नाम से पूजे जाने का वरदान मिला था.
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कहते हैं कि महाभारत का युद्ध खत्म होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बर्बरीक का शीश रूपवती नदी में बहाया गया था, जो राजस्थान के सीकर जिले में जमीन में मिला था.
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इसी के चलते बाबा का संबंध राजस्थान और हरियाणा से जुड़ा हुआ है, इसलिए यहां के भक्त बाबा श्याम को कुलदेवता के रूप में पूजते हैं. साथ ही कुछ लोग तो यहां अपने बच्चों के बाल उतरवाने भी लेकर आते हैं और यहां पर शादी गठजोड़ की जात भी लगाई जाती है.
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खाटू श्याम जी मंदिर के बारे में मान्यता है कि सभी जगह से निराश होकर जो व्यक्ति उनके दरबार में आता है, वहां से कभी निराश नहीं लौटता. बाबा श्याम सभी की मुरादें पूरी करते हैं.
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डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी और लोगों द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.