Khatu Shyam Ji: वैसे तो खाटू श्याम जी के नाम लेने से ही दुख दूर होने लगते हैं लेकिन आज हम आपको बाबा की एक ऐसी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बाबा श्याम से पूरे साल जुड़ी रहती है, जिसे बागा कहा जाता है.
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खाटू श्याम जी से उनका 'बागा' पूरे साल जुड़ा रहता है. ये काफी फलदायक होता है. इसको श्याम बाबा पूरे साल धारण कर रहते हैं. यह चीज सीमित मात्रा में होती है, जिसका काफी धार्मिक महत्व है. बागा को पाने की ललक लाखों श्रद्धालुओं के मन में होती है और जिसे ये मिल जाता है, वो खुद को बहुत सौभाग्यशाली समझा जाता है.
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बागा बाबा श्याम की पोशाक है यानी बाबा खाटू श्याम जो पोशाक धारण करते हैं उसे बागा कहते हैं. ये बसंती यानी पीले रंग का एक कपड़ा होता है, जिसको बाबा श्याम हर वक्त अन्तः वस्त्र के रूप में धारण किए रहते हैं. इसकी लंबाई एक या सवा मीटर की होती है.
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जानकारी के अनुसार, बागा दो तरह का होता है. पहली तरह के बागा को बाहरी बागा और दूसरी तरह के बाग को अंदरूनी बागा कहते हैं.
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बाहरी बागा वो वस्त्र होता है, जिसे बाबा श्याम कपड़ों के रूप में हर रोज पहनते हैं, जिसको रोज बदल दिया जाता है. ये अलग-अलग रंगों और डिजाइन का होता है.
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अंदरूनी बागा वो वस्त्र होता है, जिसे बाबा श्याम अन्तः वस्त्र के रूप में बाहरी बागा के नीचे पहनते हैं, जो पीले या बसंती रंग का सादा कपड़ा होता है. ये हर रोज नहीं बदला जाता है. इसे बाबा श्याम बसंत पंचमी के दिन धारण करते हैं और पूरे साल पहने रहते हैं.
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अंदरूनी बागा को साल में एक बार बसंत पंचमी के दिन बदला जाता है. अंदरूनी बागा का काफी धार्मिक महत्व होता है. इस बागा को बसंत पंचमी के दिन बदलकर इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में श्याम भक्तों के बीच बांटा जाता है.
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बसंत पंचमी को खाटू श्याम जी का विशेष शृंगार किया जाता है. इस दिन बाबा के शीश को पंचामृत से नहलाकर, अंदरूनी बागा के रूप में पीले रंग के अन्तः वस्त्र पहनाए जाते हैं. इसके बाद पीले रंग के फूलों से बाबा का शृंगार किया जाता है. (डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी और लोगों द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.)