Khatu shyam Ji: राजस्थान के सीकर जिले में खाटू श्याम जी का भव्य मंदिर है, जिनको कलियुग में श्याम के नाम से पूजे जाने का वरदान मिला था. ऐसे में आज हम आपको खाटू श्याम जी के दो भाइयों के बारे में बताने जा रहे हैं.
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खाटू श्याम जी कहानी महाभारत काल से जुड़ी हुई है, जिनका असली नाम बर्बरीक था. कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में अपने नाम यानी श्याम नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था.
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कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध में बर्बरीक के अलावा उनको दोनों भाइयों ने भी हिस्सा लिया था, जिनका जिक्र महाभारत में किया गया है. इनका नाम अंजनपर्व और मेघवर्ण है.
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खाटू श्याम के पिता घटोत्कच और माता अहिलावती यानी मोरवी थी, उनकी मां एक नागकन्या थी. ये सबसे बड़े बेटे थे. इनके दादा का नाम भीम थे और उनकी दादी हिडिम्बा थीं.
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कहते हैं दोनों ने महाभारत के युद्ध में भाग लिया था, जिन्होंने बड़ी वीरता का परिचय दिया. महाभारत युद्ध के 14वें दिन कर्ण के हाथों भीम के बेटे घटोत्कच और गुरु द्रोणाचार्य के बेटे अश्वत्थामा के हाथों अंजनपर्व और वनसेन के हाथों मेघवर्ण का वध हुआ.
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कथाओं के अनुसार, बर्बरीक सूर्यवर्चा नाम के यक्ष थे, जिनका पुनर्जन्म मानव के रूप में हुआ था. श्रीकृष्ण को खाटू श्याम का गुरु के रूप में देखा जाता है.
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खाटू श्याम जी यानी बर्बरीक भगवान शिव के परम भक्त थे. भगवान शंकर ने बर्बरीक को तीन अभेद्य बाण दिए थे, इसीलिए उन्हें 'तीन बाण धारी' भी कहते हैं.
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खाटू श्याम जी का मूल मंदिर 1027 में रूपसिंह चौहान और उनकी पत्नी नर्मदा कंवर ने बनवाया था. इसके बाद मारवाड़ के शासक दीवान अभय सिंह ने 1720 में मंदिर का जीर्णोद्धार करावाया था. ((डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी और लोगों द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.)