Maharaja Surajmal Death Anniversary: आज भरतपुर के संस्थापक महाराजा सूरजमल की पुण्यतिथि है. पूरे इलाके में लोग श्रद्धा से उन्हें याद कर रहे हैं. वे कुशल शासक होने के साथ-साथ बेहतरीन रणनीतिकार और कूटनीति के धनी थे. इतिहास में उन्हें खास जगह मिली है, क्योंकि मुगल दौर के अंत में उन्होंने अपनी सत्ता को न सिर्फ बचाया, बल्कि मजबूत भी किया. उनके समय में भरतपुर राज्य चरम पर पहुंचा और लोहागढ़ किला दुश्मनों के लिए अभेद्य गढ़ बन गया.
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Maharaja Surajmal Death Anniversary
महाराजा सूरजमल का दौर भरतपुर के लिए स्वर्णिम काल रहा. उन्होंने राज्य की सीमाओं को सुरक्षित किया और सैन्य ताकत को इतना बढ़ाया कि बड़े-बड़े आक्रमणकारी भी हार मान गए.
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उनकी खासियत थी युद्ध और शांति दोनों में माहिरी. किले की दीवारें और खाई की व्यवस्था ऐसी थी कि मुगल और बाद में अंग्रेज भी इसे जीत नहीं पाए. कृषि और व्यापार को उन्होंने बढ़ावा दिया, जिससे राज्य समृद्ध हुआ. आज भी लोग उनकी कहानियां सुनाते हैं कि कैसे उन्होंने कम संसाधनों से बड़ी ताकतें हराईं.
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उनके पुत्र महाराजा जवाहर सिंह ने दिल्ली पर चढ़ाई की और जीत हासिल की. इस विजय के निशान के तौर पर उन्होंने लाल किले से एक विशाल अष्टधातु दरवाजा उखाड़ लाया.
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यह दरवाजा आठ धातुओं से बना था और बेहद भारी-कीमती था. सबसे रोचक बात यह कि सदियों पहले अलाउद्दीन खिलजी ने इसे चित्तौड़गढ़ से लूटकर दिल्ली ले गया था. जवाहर सिंह ने इसे वापस लाकर लोहागढ़ किले में लगवाया, जहां यह आज भी खड़ा है.
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महाराजा सूरजमल ने लोहागढ़ को ऐसा बनाया कि कई हमलों के बावजूद यह अटूट रहा. उनके समय में कला और संस्कृति को भी प्रोत्साहन मिला. आज पुण्यतिथि पर किले में श्रद्धांजलि कार्यक्रम हो रहे हैं.
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लोग फूल चढ़ा रहे हैं और उनकी गाथाएं सुना रहे हैं. युवा पीढ़ी को यह दरवाजा और किला उनकी बहादुरी की याद दिलाता है. यह सब देखकर लगता है कि उनकी विरासत आज भी जिंदा है और आने वाली नस्लों को प्रेरणा देती रहेगी.