Maharaja Umaid Singh: केवल 16 साल की उम्र में मारवाड़ के राजा बनने वाले महाराजा उम्मेद सिंह को आधुनिक मारवाड़ का जनक और निर्माता के रूप में जाना जाता है. लेकिन मात्र 43 साल की उम्र में बीमारी के कारण उनका निधन हो गया.
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महाराजा उम्मेद सिंह
मारवाड़ के शासक महाराजा उम्मेद सिंह का जन्म 8 जुलाई 1903 में जोधपुर में हुआ था. वह महाराजा सरदार सिंह के दुसरे महाराजकुमार और महाराजा सुमेरसिंह के छोटे भाई थे. शुरुआत में उनका नाम मूल सिंह रखा गया था. लेकिन 1905 में उनका नाम बदलकर उम्मेद सिंह रखा गया था.
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शिक्षा
महाराजा उम्मेद सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजपूत नोबल्स स्कूल, चौपासनी से पूरी की थी. आगे की पढ़ाई उन्होंने मेयो कॉलेज, अजमेर और राजकुमार कॉलेज, राजकोट से पूरी की. हालांकि 1918 में उनके बड़े भाई महाराजा सुमेर सिंह के निधन के बाद उनके परिवार द्वारा वापस बुला लिया गया.
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16 साल की उम्र में बने महाराजा
बड़े भाई की अकाल मृत्यु और उनकी कोई संतान नहीं होने के कारण केवल 16 साल की उम्र में ये मारवाड़ के महाराजा के सिंहासन पर विराजमान हुए. लेकिन कम उम्र होने के कारण उनकी मदद करने के लिए सर प्रतापसिंह की अध्यक्षता में 4 दिसम्बर 1918 को रीजेंसी कौंसिल की स्थापना भी की गई.
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मारवाड़ रियासत की कायापलट की
कम उम्र में शासक बनने के बाद भी महाराजा उम्मेद सिंह ने अपने राज्य और प्रजा के लिए बहुत काम किए. केवल 30 की उम्र तक उन्होंने मारवाड़ रियासत की काया ही पलट दी थी. यही कारण है कि महाराजा उम्मेद सिंह को आज भी आधुनिक जोधपुर के निर्माता व शिल्पकार के रूप में मारवाड़ की प्रजा द्वारा स्मरण किया जाता है.
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अंग्रेजी शासन से प्राप्त हुए सम्मान
अपने शासन और व्यक्तित्व के चलते भारत की ब्रिटिश सरकार ने उन्हें अनेक बार उत्कृष्ट पदक और सम्मान प्रदान किए. जिसके अंदर 24 अक्टूबर, 1921 को उन्हें सेना में ऑनरेरी कैप्टिन का पद मिला और 17 मार्च 1922 को उन्हें के.सी.वी.ओ. की उपधि से विभूषित किया गया. 2 जून 1923 को वे ऑनरेरी मेजर बनाए गए तो वहीं 3 जून 1925 को महाराजा को सेना में के.सी.एस.आई. का सम्मान दिया गया था.
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एयर कमोडोर से ऑनरेरी लेफ्टिनेंट जनरल तक
आपको बता दें कि महाराजा उम्मेद सिंह को 1931 में 'एयर कमोडोर' का सम्मान मिला. इसी के साथ ही 18 अगस्त 1933 को वे ऑनरेरी लेफ्टिनेंट कर्नल बनाये गये व 23 जून 1936 को उन्हें ए.डी.सी. एवं सेना में ऑनरेरी कर्नल के पद से भी सम्मानित किया गया था. उनके सम्मानों की सूची इतनी ही नहीं है. उन्हें इसके बाद 1945-46 में 'एयर वाइस मार्शल' तो 15 अक्टूबर 1946 को 'ऑनरेरी लेफ्टिनेंट जनरल' की उपाधि प्रदान की गई थी.
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निर्माण
महाराजा उम्मेद सिंह ने अपने शासनकाल में उम्मेद भवन पैलेस का निर्माण करवाया था. यह निर्माण मारवाड़ में भयंकर अकाल पड़ने के बाद प्रजा के इलाज और रोजगार देने के लिए बनावाया गया था. इसी के साथ उन्होंने महिलाओं के लिए सबसे बड़ा अस्पताल, सिल्वर जुबली कोर्ट, बच्चों के लिए पाठशाला और अपने राज्य में उड्डयन विभाग की भी स्थापना की थी. आपको बता दें कि महाराजा उम्मेद सिंह खुद एक कुशल पायलट थे.