Moti Dungri Ganesh: दीपोत्सव के अवसर पर मोतीडूंगरी के राजा गणेशजी का श्रृंगार इस बार पहले से भी अधिक भव्य और अद्वितीय होगा. परंपरा और आस्था के इस संगम में भगवान गणेश को दीपावली के दिन विशेष लक्खी श्रृंगार में सजाया जाएगा.
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Motidungri Shri Ganeshji
दीपोत्सव के अवसर पर मोतीडूंगरी के राजा गणेशजी का श्रृंगार इस बार पहले से भी अधिक भव्य और अद्वितीय होगा. परंपरा और आस्था के इस संगम में भगवान गणेश को दीपावली के दिन विशेष लक्खी श्रृंगार में सजाया जाएगा. पहली बार दीपावली पर गणेशजी महाराज 3 किलो 600 ग्राम चांदी से बनी फिरोजा रंग की पोशाक और स्वर्ण मुकुट धारण कर अपने भक्तों को दर्शन देंगे.
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जब दीपों की जगमगाहट में पूरा जयपुर रौशन होता है, तब मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में दिव्यता का अनोखा संगम होता है. इस बार दिवाली पर गणेशजी महाराज का श्रृंगार न केवल भक्तों की आस्था, बल्कि कारीगरों की महीनों की तपस्या का प्रतीक बनेगा. दीपोत्सव के दिन भगवान श्रीगणेशजी 3 किलो 640 ग्राम चांदी से तैयार फिरोजा रंग की पोशाक में अपने भक्तों को दर्शन देंगे.
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इस अद्भुत पोशाक की खासियत यह है कि इसके चारों ओर अंगूरी ग्रीन रंग की बॉर्डर उकेरी जा रही है. जो फिरोजा रंग की चांदीदार पोशाक को और भी दमकदार बना रहा है, जिससे इसका आकर्षण और निखर उठेगा. पोशाक की कुल कीमत करीब 10 लाख रुपए है, जिसे पिछले सात महीनों से 20 कारीगर दिन-रात मिलकर तैयार किया है. पोशाक में करीब 30 मीटर कपडे़ का इस्तेमाल किया गया है. कुल वजन कपड़ों सहित 8 किलो तक पहुंच गया है.
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मंदिर में दीपोत्सव की शुरुआत पुष्य नक्षत्र से हो चुकी है. पुष्य नक्षत्र के दिन गणेशजी को पीले रंग की पोशाक धारण करवाई गई. धनतेरस पर गुलाबी रंग की गोटेदार, रूप चौदस पर सुंदरी रंग की और दीपावली की रात गणेशजी फिरोजा चांदी के काम से सजी पोशाक में अपने भक्तों को दर्शन देंगे. मंदिर परिसर को भी दीपों, फूलों और लाइटिंग से दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है.
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मोतीडूंगरी मंदिर के महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि चांदी से तैयार फिरोजा रंग की पोशाक दीपावली की विशेष वेशभूषा होगी, जिसका हर धागा श्रद्धा से बुना गया है. चांदी का काम इतना महीन है कि हर इंच पर हाथ की कारीगरी की झलक दिखती है. उन्होंने बताया कि पहली बार दीपावली के अवसर पर सोने, चांदी, हीरा, पन्ना और माणिक्य से जड़ा मुकुट भी गणेशजी को धारण करवाया जाएगा.
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गणेशजी के वार्डरोब में इस समय 350 से अधिक विशेष पोशाकें सुरक्षित रखी गई हैं, जिनमें से हर त्यौहार और अवसर पर अलग-अलग परिधान धारण कराए जाते हैं. उन्होंने बताया कि मोतीडूंगरी गणेशजी के इस दिवाली श्रृंगार को देखने के लिए भक्त पहुंचते हैं. हर वर्ष की तरह इस बार भी मंदिर परिसर को फूलों, दीपों और लाइटिंग से दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है. भक्ति और आस्था के इस पर्व में मोतीडूंगरी गणेशजी का लक्खी श्रृंगार भक्तों के लिए दिव्य दर्शन का अवसर लेकर आएगा.
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मोतीडूंगरी के राजा का यह श्रृंगार केवल चांदी और कपड़े का नहीं, बल्कि यह उस आस्था की कलाकारी है, जिसमें हर धागे में भक्ति, हर किनारी में श्रद्धा और हर रंग में जयपुर की परंपरा झलकती है. जैसे ही दीप जलेंगे, घंटियां बजेंगी और आरती की गूंज उठेगी वैसे ही इस दिव्य श्रृंगार में सजे गणेशजी का दर्शन, भक्तों के लिए दीपावली की सबसे बड़ी सौगात साबित होगा.