Naresh Meena: नरेश मीणा 42 दिन बाद झालावाड़ जेल से रिहा! बोले, "जिस नेता ने मुझे जेल भेजा, उससे गिन-गिनकर हिसाब लूंगा." समर्थकों ने की नारेबाजी.
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राजस्थान के चर्चित नेता और सामाजिक कार्यकर्ता नरेश मीणा को 42 दिन की कैद के बाद शनिवार शाम 5:50 बजे झालावाड़ जेल से रिहा कर दिया गया. रिहाई के बाद नरेश मीणा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मैं बच्चों को न्याय दिलाने के लिए धरने पर बैठा था.
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मुझे कई धाराओं में फंसाकर सवा महीने तक जेल में रखा गया. जिस नेता ने मुझे जेल भेजा, उसका पता लग चुका है और समय आने पर मैं उससे गिन-गिनकर हिसाब लूंगा.
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वह दिन जरूर आएगा जब हिसाब बराबर होगा." उनकी रिहाई के मौके पर जेल के बाहर समर्थकों ने उनके समर्थन में नारेबाजी की और बाद में वे बारां के लिए रवाना हो गए.
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दरअसल, नरेश मीणा ने झालावाड़ में 25 जुलाई 2025 को पिपलोदी के सरकारी स्कूल में हुए हादसे के विरोध में प्रदर्शन किया था, जिसमें स्कूल की इमारत का हिस्सा गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी.
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इस हादसे के बाद मृतक बच्चों के आश्रितों और घायलों को आर्थिक सहायता की मांग को लेकर नरेश मीणा SRG हॉस्पिटल के बाहर धरने पर बैठे थे.
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इस दौरान पुलिस ने उन्हें और उनके दो समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया था. दो दिन पहले राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी होने पर उनकी रिहाई संभव हो सकी.
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नरेश मीणा का यह पहला जेल प्रवास नहीं है. इससे पहले, देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने के दौरान 14 नवंबर 2024 को उन्होंने SDM अमित कुमार चौधरी को थप्पड़ मार दिया था, जिसके बाद उन्हें समरावता गांव से गिरफ्तार किया गया था.
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करीब आठ महीने बाद 14 जुलाई 2025 को टोंक जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने हाड़ौती क्षेत्र में जन क्रांति यात्रा शुरू की थी. इसी दौरान पिपलोदी स्कूल हादसे ने उन्हें फिर से चर्चा में ला दिया. नरेश मीणा की रिहाई ने एक बार फिर उनके सियासी और सामाजिक प्रभाव को उजागर किया है, और उनकी यह टिप्पणी कि वे हिसाब बराबर करेंगे, राजस्थान की सियासत में नई हलचल पैदा कर सकती है.