सोना, चांदी और शिल्प का ताजमहल – ये है पटवों की हवेली की अनकही दास्तान!

Patwa Haweli: हर साल लाखों सैलानी जैसलमेर की उन खूबसूरत हवेलियों को देखने आते हैं, जो पीले बलुआ पत्थरों से बनी हुई हैं और जिनकी झरोखों, बालकनियों व दीवारों पर की गई महीन नक्काशी किसी अजूबे से कम नहीं लगती. ये हवेलियां न सिर्फ राजस्थान की धरोहर हैं.

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राजस्थान की धरोहर

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हर साल लाखों सैलानी जैसलमेर की उन खूबसूरत हवेलियों को देखने आते हैं, जो पीले बलुआ पत्थरों से बनी हुई हैं और जिनकी झरोखों, बालकनियों व दीवारों पर की गई महीन नक्काशी किसी अजूबे से कम नहीं लगती. ये हवेलियां न सिर्फ राजस्थान की धरोहर हैं, बल्कि भारत की समृद्ध कला और स्थापत्य परंपरा की भी शानदार झलक पेश करती हैं.
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पटवा परिवार

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इनका निर्माण करीब दो सदियों पहले, 1805 में पटवा परिवार के मुखिया गुमानचंद ने अपने पांच बेटों के लिए शुरू करवाया था. हवेलियों को पूरा होने में लगभग 50 साल लगे, और हर हवेली को एक-एक बेटे के लिए खास तौर पर बनवाया गया. 19वीं शताब्दी के इस निर्माण ने उस दौर की आर्थिक समृद्धि और कला के प्रति प्रेम को दर्शाया.