Rajasthan Quiz: हिण्डौन संसदीय क्षेत्र के 15 साल के छोटे से इतिहास में अनोखा संयोग रहा। यहां से टीकाराम पालीवाल सांसद बने और बाद में CM, जबकि जगन्नाथ पहाड़िया पहले CM बने और फिर यहीं से सांसद. दोनों का हिण्डौन से गहरा जुड़ाव राजनीति में यादगार रहा.
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कौन दो नेता बने मुख्यमंत्री
राजस्थान के इतिहास में एक लोकसभा सीट ऐसी लक्की रही है, जहां से राज्य को दे मुख्मंत्री मिले हैं. और ये दो सीएम और कोई नहीं बल्कि खुद टीकाराम पालीवाल और जगन्नाथ पहाड़िया थे.
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हिण्डौन लोकसभा सीट
राजस्थान की राजनीति में कई रोचक संयोग मिलते हैं, लेकिन हिण्डौन संसदीय क्षेत्र की कहानी सबसे अलग है. तीसरी से लेकर पांचवी लोकसभा तक महज 15 वर्षों के छोटे से संसदीय इतिहास में इस क्षेत्र से जुड़ा एक ऐसा अनूठा संयोग रहा, जो आज भी बुजुर्गों की जुबां पर ताजा है.
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टीकाराम पालीवाल
राज्य के चौथे मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत विधायक के रूप में की. महवा से विधायक चुने जाने के बाद वर्ष 1951 में वे मुख्यमंत्री बने, हालांकि उनका कार्यकाल एक वर्ष से भी कम रहा. इसके बाद दो बार विधायक रहने के बाद वे 1962 में हिण्डौन संसदीय क्षेत्र से तीसरी लोकसभा के लिए सांसद चुने गए. इस जीत ने उन्हें प्रदेश की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर जाने का अवसर दिया. वकालत के पेशे और राजनीतिक सक्रियता के चलते उनका हिण्डौन से गहरा जुड़ाव रहा.
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जगन्नाथ पहाड़िया
इसके बाद हिण्डौन संसदीय क्षेत्र का नया अध्याय शुरू हुआ. जब यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई, तब कांग्रेस नेता जगन्नाथ पहाड़िया यहां से उभरे. वे चौथी और पांचवी लोकसभा (1967 और 1971) में सांसद बने. पहाड़िया का हिण्डौन से निजी जुड़ाव भी रहा, क्योंकि उनकी रिश्तेदारी इस क्षेत्र में थी. लोकसभा से शुरू हुआ उनका सफर उन्हें आगे प्रदेश की सबसे बड़ी कुर्सी तक ले गया. वर्ष 1980 में वे राजस्थान के 9वें मुख्यमंत्री बने. उस समय वे वैर से विधायक थे, लेकिन उनकी पहचान हिण्डौन से सांसद रहते हुए ही बनी थी.
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सांसद से सीएम की कुर्सी तक
दोनों नेताओं का जीवन पथ अलग-अलग रहा, पर हिण्डौन ने उन्हें एक साझा मंच दिया. एक नेता ने पहले सांसद बनने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच बनाई, जबकि दूसरे ने मुख्यमंत्री बनने के बाद इसी क्षेत्र से सांसद के रूप में पहचान हासिल की. यह संयोग राजस्थान की राजनीति में किसी मिसाल से कम नहीं है.
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दोनों नेताओं का यहां से है गहरा रिश्ता
आज दोनों ही नेता दिवंगत हैं, लेकिन चुनावी मौसम में जब भी सियासत की चर्चा होती है, हिण्डौन का यह सुनहरा अध्याय याद किया जाता है. स्थानीय बुजुर्ग अब भी बताते हैं कि कैसे टीकाराम पालीवाल और जगन्नाथ पहाड़िया का हिण्डौन से गहरा रिश्ता रहा. यही रिश्ता इस क्षेत्र को राजस्थान की राजनीति में हमेशा खास बनाए रखता है.
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प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. Zee Rajasthan इसकी पुष्टि नहीं करता है.