Rajasthan Quiz: राजस्थान में अब तक 4 बार राष्ट्रपति शासन लगा है 1967, 1977, 1980 और 1992 में. वजह रही बहुमत का अभाव, राजनीतिक अस्थिरता, सरकार बर्खास्तगी और बाबरी मस्जिद विवाद. इनमें 1992–93 का राष्ट्रपति शासन सबसे लंबा, लगभग एक साल चला.
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राजस्थान में राष्ट्रपति शासन
राजस्थान का राजनीतिक इतिहास कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. इनमें सबसे खास घटनाएं वे हैं, जब राज्य में लोकतांत्रिक सरकार के बजाय सीधे केंद्र सरकार का नियंत्रण स्थापित किया गया. इसे राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) कहा जाता है. राजस्थान में अब तक कुल चार बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया है.
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पहली बार - मार्च 1967
13 मार्च 1967 से 26 अप्रैल 1967 तक पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ. इसका कारण विधानसभा चुनावों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलना था. राजनीतिक अस्थिरता के चलते राज्य सरकार नहीं बन पाई, इसलिए केंद्र को हस्तक्षेप करना पड़ा. यह राष्ट्रपति शासन केवल 44 दिनों तक चला.
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दूसरी बार - अप्रैल 1977
29 अप्रैल 1977 से 22 जून 1977 तक दूसरी बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ. उस समय सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य सरकार गिर गई. जनता पार्टी लहर के बीच कई राज्यों में कांग्रेस सरकारें हिलीं और राजस्थान भी इससे अछूता नहीं रहा.
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तीसरी बार - फरवरी 1980
16/17 फरवरी 1980 से 5/6 जून 1980 तक तीसरी बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ. इस बार मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत की सरकार को बर्खास्त कर दिया गया. कारण था. केंद्र और राज्य सरकार के बीच गंभीर राजनीतिक मतभेद. इससे साफ झलकता है कि उस दौर में केंद्र का दखल प्रदेश की राजनीति पर गहरा असर डालता था.
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चौथी बार - दिसंबर 1992
15 दिसंबर 1992 से 3/4 दिसंबर 1993 तक चौथी बार और सबसे लंबा राष्ट्रपति शासन लगाया गया. बाबरी मस्जिद विवाद के बाद देशभर की राजनीतिक स्थिति बिगड़ी. इसके चलते राजस्थान समेत कई राज्यों की भाजपा सरकारें बर्खास्त कर दी गईं. भैरों सिंह शेखावत की सरकार भी इसी कारण गिरी. यह राष्ट्रपति शासन लगभग एक साल तक चला.
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निष्कर्ष
राजस्थान में राष्ट्रपति शासन हमेशा राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता संघर्ष का नतीजा रहा है. कभी बहुमत का अभाव, तो कभी केंद्र-राज्य टकराव और राष्ट्रीय घटनाएं इसकी वजह बनीं. यह इतिहास हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र को स्थिर रखने के लिए मजबूत राजनीतिक सहमति और विश्वास जरूरी है.