Mughal: मुगल शासक औरंगजेब ने मथुरा के श्रीनाथजी मंदिर को नष्ट करने का आदेश दिया, लेकिन पुजारी दामोदर दास ने मूर्ति को सुरक्षित निकालकर मेवाड़ के राजा राजसिंह की मदद से नाथद्वारा में स्थापित किया. आज यह मंदिर आस्था और संस्कृति का प्रतीक है.
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औरंगजेब
मुगल शासक औरंगजेब का शासनकाल मंदिरों और मूर्तियों पर हुए हमलों के लिए कुख्यात माना जाता है. उसने कई प्राचीन मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया. उन्हीं में मथुरा का प्रसिद्ध श्रीनाथजी मंदिर भी शामिल था, जहां भगवान कृष्ण की विग्रह मूर्ति स्थापित थी. कहा जाता है कि मंदिर में हीरे-जवाहरात जड़े आभूषण थे, जिन पर औरंगजेब की नजर थी.
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मंदिर पर आया संकट
जैसे ही औरंगजेब के आदेश पर मंदिर पर संकट आया, पुजारी दामोदर दास बैरागी ने श्रीनाथजी की मूर्ति को सुरक्षित निकालने का साहसिक कदम उठाया. वे मूर्ति को बैलगाड़ी में रखकर मथुरा से निकल पड़े. रास्ते में उन्होंने कई राजाओं से मूर्ति को सुरक्षित रखने की प्रार्थना की, लेकिन औरंगजेब के डर से किसी ने मदद करने का साहस नहीं दिखाया.
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मेवाड़ के वीर राजा राजसिंह
यात्रा कठिन थी और हालात प्रतिकूल. हर ओर मुगल सैनिकों का डर था. फिर भी दामोदर दास मूर्ति की रक्षा करते रहे. आखिरकार उन्होंने मेवाड़ के वीर राजा राजसिंह को संदेश भेजा. राजसिंह पहले भी औरंगजेब के खिलाफ खड़े हो चुके थे. वे जानते थे कि यह केवल मूर्ति की रक्षा नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति की रक्षा है.
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मूर्ति को शरण देने का निर्णय लिया
राजा राजसिंह ने बिना देर किए मूर्ति को शरण देने का निर्णय लिया. श्रीनाथजी की मूर्ति को सुरक्षित रूप से सिहाड़ गांव लाया गया. यहां मूर्ति की स्थापना की गई और धीरे-धीरे यह स्थान 'नाथद्वारा' के नाम से प्रसिद्ध हो गया. आज नाथद्वारा विश्वभर में श्रीनाथजी की नगरी के रूप में जाना जाता है.
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औरंगजेब की आंखों पर पड़ा असर
लोककथाओं में यह भी कहा जाता है कि श्रीनाथजी के चमत्कार से औरंगजेब की आंखों पर असर हुआ और वह अंधा होने लगा. चाहे यह तथ्य ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित न हो, लेकिन भक्तों के लिए यह आस्था का हिस्सा है.
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नाथद्वारा की कहानी
यह पूरी कहानी दर्शाती है कि किस तरह एक पुजारी की निष्ठा और एक राजा का साहस मिलकर आस्था की रक्षा कर गया. औरंगजेब अपने आदेशों के बावजूद श्रीनाथजी मंदिर को नष्ट नहीं कर पाया. आज नाथद्वारा का मंदिर न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की जीवंत गाथा है, जहां हर दिन लाखों श्रद्धालु भगवान श्रीनाथजी के दर्शन करने पहुंचते हैं.
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