Mughal: अकबर ने राजपूतों से कूटनीति व वैवाहिक गठबंधन कर उन्हें उच्च पद दिए और साम्राज्य की रीढ़ बनाया. औरंगजेब ने प्रशासन में सबसे अधिक हिंदू व राजपूत मनसबदार तो रखे, पर बड़े राजपूत घरानों की ताकत घटाने का प्रयास किया और उनकी भूमिका सीमित कर दी.
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मुगल शासनकाल
मुगल शासनकाल में राजपूतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है. अलग-अलग बादशाहों ने अपनी-अपनी नीतियों के अनुसार राजपूतों को प्रशासन और सेना में जगह दी. खासकर अकबर और औरंगजेब के दौर में उनकी स्थिति अलग-अलग रूप में सामने आई.
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अकबर
अकबर ने राजपूतों के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाने के लिए कूटनीति और वैवाहिक गठबंधन का सहारा लिया. उसने युद्ध की जगह सहयोग को प्राथमिकता दी. इस नीति से राजपूतों का विश्वास जीता और उन्हें साम्राज्य में विशेष स्थान दिया.
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सेनापति बनाया
राजपूतों की वफादारी के बदले अकबर ने उन्हें उच्च पदों पर नियुक्त किया. कई राजपूतों को राज्यपाल और सेनापति बनाया गया. राजा मान सिंह जैसे योद्धा अकबर के सबसे भरोसेमंद सेनापतियों में गिने गए और उन्हें उच्च मनसब प्रदान किया गया.
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औरंगजेब
औरंगजेब के समय स्थिति कुछ अलग थी. धार्मिक रूप से कट्टर माने जाने के बावजूद उसके प्रशासन में हिंदू कर्मचारियों की संख्या सबसे अधिक थी. इनमें बड़ी संख्या राजपूतों की भी थी, जिन्होंने युद्धों में कमान संभाली.
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बड़े राजघरानों को किया परेशान
इतिहासकारों के अनुसार, औरंगजेब ने कई हिंदू संस्थानों को संरक्षण भी दिया. यहां तक कि उत्तराधिकार के युद्ध में उसे राजपूतों का समर्थन मिला. इस कारण उसके प्रशासन में राजपूतों की मौजूदगी और भी मजबूत हुई. फिर भी औरंगजेब ने बड़े राजपूत घरानों जैसे जयपुर, जोधपुर और मेवाड़ की ताकत को कमजोर करने का प्रयास किया. वह उन्हें बार-बार परेशान करता रहा और उनके महत्व को कम करने की कोशिश करता रहा.
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छोटे मनसब दिए
इतिहासकारों के अनुसार, दक्षिण भारत की नीति के लिए औरंगजेब ने मराठा, कायस्थ और राजपूतों को छोटे-बड़े मनसब दिए. संख्या की दृष्टि से ये पहले से अधिक थे, लेकिन उनका महत्व सीमित था. इसी कारण अकबर ने राजपूतों को साम्राज्य की रीढ़ बनाया, जबकि औरंगजेब ने उनकी संख्या तो बढ़ाई पर असल ताकत कम कर दी.
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Disclaimer
प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. जिसे लिखने में डॉक्टर लोकेंद्र सिंह चुंडावत, प्रोफेसर इतिहास कॉलेज, एजुकेशन गवर्नमेंट ऑफ़ राजस्थान का मार्गदर्शन लिया गया है.