Rajasthan News: भूख से बड़ी कोई मजबूरी नहीं होती और जब सरकार कहे कि कोई भूखा नहीं सोएगा, तो उम्मीदें और बढ़ जाती हैं, लेकिन राजस्थान में शुरू की गई अन्नपूर्णा रसोई योजना जो सिर्फ 8 रुपए में भरपेट भोजन देने का दावा करती है. अब अपने ही मकसद से भटक गई है.
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Annapurna Rasoi Yojana
राज्य सरकार ने अन्नपूर्णा रसोई योजना की शुरुआत इस सोच के साथ की थी कि कोई भूखा न रहे और हर जरूरतमंद को पोषक खाना मिले, लेकिन जमीन पर तस्वीर बिल्कुल उलटी है. ज़ी मीडिया की टीम ने गांधी नगर रेलवे स्टेशन, लालकोठी सब्जी मंडी और गांधी नगर क्षेत्र में अन्नपूर्णा रसोई का रियलिटी चेक किया और जो नजारा दिखा, उसने दावों की पोल खोल दी.
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थाली में न दाल का स्वाद, मिलेट्स, सलाद सब गायब. सलाद, आचार और मिलेट्स पूरी तरह गायब मिला. रोटियां आधी कच्ची और इतनी पतली कि जैसे कागज खा रहे हों. खाना खाने पहुंचे रिक्शा चालकों और मजदूरों ने कहा कि क्या करें साहब, मजबूरी है. स्वाद नहीं पर पेट में कुछ तो चला जाता है.
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अन्नपूर्णा रसोई का संचालन करने वाली संस्थाओं को राज्य सरकार प्रति थाली 22 रुपए का अनुदान देती है, जबकि ग्राहक से 8 रुपए वसूले जाते हैं. यानी 30 रुपए की थाली का दावा किया जाता है, लेकिन न तो मेन्यू लागू है न क्वालिटी पैरामीटर का पालन. रसोई में साफ-सफाई का अभाव, कचरे के ओवरफ्लो डिब्बे, खराब वॉटर कूलर, बंद कंप्यूटर, डिसकनेक्ट वाई-फाई और ऑनलाइन एंट्री सिस्टम जैसी लापरवाहियां आम हैं. यहां तक कि CCTV कैमरे भी सिर्फ दिखावे के लिए लगाए गए हैं.
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थाली में 600 ग्राम भोजन का दावा किया गया है, जिसमें 100 ग्राम मिलेट्स या खिचड़ी शामिल होने चाहिए, लेकिन असलियत में थाली आधी खाली है. ऊपर से 8 रुपए की जगह 10 रुपए वसूले जा रहे हैं यानी गरीब की थाली पर भी कमाई का खेल चल रहा है.
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अन्नपूर्णा रसोई चलाने वाले संस्थओं को पता है कि यहां वहीं लोग आते हैं जो मजबूरी में भूख मिटाने आते हैं, शिकायत करने नहीं. इसी भरोसे पर थाली का वजन तो बढ़ाकर 600 ग्राम दिखाया जाता है. मगर असल में उसका ज्यादातर हिस्सा पानी और अधपके चावल से पूरा किया जाता है. जब सरकार हर थाली पर 22 रुपए दे रही है, तो वो पैसा आखिर जा कहां रहा है.
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रसोई का संचालन करने वाली संस्थाओं, निगरानी करने वाले अफसरों और स्थानीय निकायों के बीच जवाबदेही की रेखाएं धुंधली पड़ गई हैं. सरकार को अब सिर्फ निरीक्षण नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करनी होगी.
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गुणवत्ता मानक उल्लंघन, ओवरचार्जिंग और साफ-सफाई की अनदेखी करने वाली संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए वरना आने वाले समय में अन्नपूर्णा रसोई गरीबों की थाली नहीं, बल्कि सरकारी असंवेदनशीलता का प्रतीक बन जाएगी.