Barmer News: आज हम आपको राजस्थान के बाड़मेर में रहने वाली उस महिला की कहानी के बारे में बताएंगे, जिसने बचपन में NCC लेफ्टिनेंट बनने के सपना देखा था, जो उसके ससुराल में पूरा हुआ. जानिए उनकी कहानी.
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NCC Lieutenant Sarita Lild
राजस्थान के बाड़मेरी की रहने वाली इस महिला का नाम सरिता है, जो अब लेफ्टिनेंट (ANO) सरिता बन गई हैं. इनका पूरा नाम सरिता लीलड़ है, जो दो बेटियों की मां हैं. सरिता लीलड़ ने 75 दिनों तक मध्यप्रदेश के ग्वालियर ओटीए में एनसीसी ट्रेनिंग ली और इसके बाद उनको एनसीसी में लेफ्टिनेंट का पद मिला
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सरिता गर्ल्स कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर है. सरिता गर्ल्स कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर है लेकिन अब वह बाड़मेर की पहली महिला असिस्टेंट NCC ऑफिसर भी बन गई हैं.
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साल 2019 में सरिता लीलड़ बाड़मेर गर्ल्स कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर बनी. वहीं, साल 2020 में कॉलेज में एनसीसी की विंग शुरू हुई, जिसका चार्ज सरिता को मिला. यही से उन्होंने सोचा की मुझे ट्रेनिंग लेनी चाहिए.
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सरिता का पीहर कोलू गांव है, लेकिन उनके पापा की नौकरी लगने के बाद वे लोग जोधपुर आ गए. यही से सरिता ने पढ़ाई की. सरिता की पोस्ट ग्रेज्युएशन पूरी होने के बाद आरपीएससी की पोस्ट आ गई थी.
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वहीं, साल 2019 में पहले प्रयास में ही उनको असिस्टेंट प्रोफेसर के पद मिल गया. वहीं, कॉलेज में एनसीसी ओपन हुई, जिसके बाद उनको इसका चार्ज मिली. वहीं, साल 2020 में गर्ल्स कॉलेज में उन्होंने एनसीसी संभाली.
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वहीं, इसके बाद उन्होंने इंटरव्यू दिए लेकिन पहली बारी में वो जा नहीं सकी. फिर दूसरी बार सितंबर 2024 में इंटरव्यू दिया और सलेक्शन हो गया. इसके बाद ट्रेनिंग ग्वालियर (मध्यप्रदेश) में 7 जुलाई से शुरू हुई, जो 75 दिन तक चली.
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सरिता ने कहा कि मेरा परिवार मेरे साथ था. शादी के बाद मेरे सास-ससुर ने मुझे पढ़ाई करने को कहा. मेरे ससुर मुझ पर हमेशा विश्वास किया और कहते कि सरिता जो कर रही है वो अच्छा ही करेगी. वहीं, जब ट्रेनिंग लेकर आई तब मैंने मेरे ससुर को सैल्यूट किया.