Rajasthani Dish: खाने-पीने के शौकीनों के लिए राजस्थान की ये टेस्टी डिश एक बार जरूर ट्राई करना चाहिए. झुंझुनूं के चिड़ावा का साग-रोटा सर्दियों में एक करोड़ से ज्यादा का कारोबार करता है. यह स्वादिष्ट व्यंजन बेसन और आटे के रोटे के साथ फूलगोभी-मटर का साग है, जो देशभर में लोकप्रिय है.
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साग-रोटा
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में, चिड़ावा का नाम सुनते ही लोग अक्सर यहां की प्रसिद्ध मिठाइयों के बारे में सोचते हैं, लेकिन यहां की एक और खास डिश है जिसने देशभर में अपनी पहचान बनाई है – साग-रोटा. यह लजीज व्यंजन इतना लोकप्रिय है कि केवल चार महीने की सर्दियों के मौसम में इसका कारोबार एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा का हो जाता है.
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सर्दियों की खास डिश
साग-रोटा मुख्य रूप से सर्दियों की एक खास डिश है. इसका सीजन नवंबर से शुरू होकर फरवरी तक चलता है. चिड़ावा में कई दुकानों पर इसे हर बुधवार, शुक्रवार और रविवार को विशेष रूप से बनाया जाता है, हालांकि बढ़ती मांग के कारण कुछ जगह यह अब रोज भी तैयार होने लगा है.
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इतिहास
व्यवसाय से जुड़े लोग बताते हैं कि इस व्यंजन का चलन करीब चार दशक पहले शुरू हुआ था और आज यह हर घर में जाना-पहचाना नाम बन चुका है.
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देशी घी का स्वाद
देशी घी में बनने के कारण यह न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि सेहतमंद भी माना जाता है. इसमें फूलगोभी और मटर की सब्जी (साग) को घी और मसालों के तड़के के साथ बनाया जाता है.
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कीमत
साग-रोटा की डाइट भी तय होती है. एक "फुल डाइट" में 14 से 16 रोटे और लगभग एक किलो साग दिया जाता है, जिसकी कीमत 600 से 700 रुपये तक होती है. वहीं, "हाफ डाइट" में 7 से 8 रोटे और आधा किलो साग मिलता है.
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बनाने की विधि
इसे बनाने की विधि भी बहुत खास है. साग बनाने के लिए घी में जीरा, प्याज, लहसुन और अन्य मसालों का तड़का लगाया जाता है, जिसके बाद उसमें फूलगोभी और मटर को मिलाया जाता है. रोटा बनाने के लिए 70% बेसन और 30% आटे को दूध में गूंथकर घी का मोयन लगाया जाता है.
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देशभर में एक अलग पहचान
इस खास रेसिपी ने चिड़ावा को देशभर में एक अलग पहचान दी है. यही वजह है कि यह व्यंजन जयपुर, कोटा, सीकर, जोधपुर, गंगानगर, दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भी खूब पसंद किया जा रहा है. साग-रोटा का यह व्यवसाय कई लोगों को रोजगार भी दे रहा है, जिससे यह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया है.