Diwali 2025: मावा कचौरी राजस्थान का अनोखा मीठा व्यंजन है. खस्ता मैदे में खोया और मेवों की फीलिंग भरकर इसे चाशनी में डुबोया जाता है. यह दिवाली पर परोसने के लिए एकदम सही शाही मिठाई है.
1/7
मावा कचौरी
राजस्थान का नाम सुनते ही जहां दाल-बाटी चूरमा या तीखी कचौरी का खयाल आता है, वहीं यहां के पकवानों में एक ऐसा मीठा चमत्कार भी है जो हर किसी को हैरान कर देता है—यह है मावा कचौरी. यह अनोखा व्यंजन उस पारंपरिक नमकीन कचौरी से बिल्कुल अलग है जिसे हम जानते हैं, और इसी कारण यह दिवाली जैसे त्योहारों पर राजस्थान की शान बन जाता है.
2/7
मावा कचौरी
मावा कचौरी असल में खस्तापन और मिठास का लाजवाब संगम है. इसे बनाने की प्रक्रिया में महारत की ज़रूरत होती है. सबसे पहले, मैदे को गूंथकर कचौरी का बाहरी आवरण तैयार किया जाता है, जो डीप फ्राई होने के बाद बिल्कुल खस्ता और परतदार हो जाता है.
3/7
सामग्री
मावा कचौरी की सामग्री 500 gms मैदा,100 ग्राम घी 200 ml, पानी1 kg, चीनी एक चुटकी केसर, 200 ग्राम स्वीट मावा 15 ग्राम पिस्ता (छीला हुआ), टुकड़ों में कटा हुआ15 ग्राम बादाम (छीला हुआ), टुकड़ों में कटा हुआघी (तलने के लिए)
4/7
स्वाद
लेकिन इसका असली जादू फीलिंग में छिपा है. इस खस्ता आवरण को मावे (खोया) और सूखे मेवों (जैसे काजू, बादाम, पिस्ता) के गाढ़े और सुगंधित मिश्रण से भरा जाता है. यह मावा इतना समृद्ध और गाढ़ा होता है कि मुंह में जाते ही घुल जाता है.
5/7
सुनहरा भूरा
कचौरी को सुनहरा भूरा होने तक तला जाता है. तलने के बाद, यह गरमागरम कचौरी तुरंत इलायची की खुशबू वाली गाढ़ी चाशनी में डुबोई जाती है. चाशनी की मिठास कचौरी के खस्तापन और अंदर की मावेदार फीलिंग के साथ मिलकर एक ऐसा स्वाद पैदा करती है, जो अद्वितीय है.
6/7
मिठास और जायके
मावा कचौरी सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि राजस्थानी शाही व्यंजनों की विरासत का प्रतीक है. दिवाली के अवसर पर, यह मेहमानों को परोसने के लिए एकदम सही है, जो उन्हें मिठास और जायके की एक अनोखी दुनिया का अनुभव कराता है.
7/7
व्यंजन
मावा कचौरी खाने वाले को यह अहसास दिलाती है कि नमकीन हो या मीठा, राजस्थान का हर व्यंजन अपने आप में खास है.