Gulab Halwa: पाली शहर का नाम वैसे तो टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां की एक मिठाई ने भी इस शहर को खास पहचान दिलाई है. खासकर त्योहारों के मौसम में अगर मारवाड़ की थाली में यह हलवा न हो, तो सब अधूरा-अधूरा सा लगता है.
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गुलाब हलवा
यूं तो पाली अपने टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. लेकिन यहां की एक स्पेशल मिठाई का स्वाद लोगों की जुबांपर चढ़ा हुआ है कि लोग भूलने का नाम नहीं ले रहे हैं. इतना ही नहीं लोग इसे खाने के लिए देश-विदेश से पाली आते हैं. हम बात कर रहे हैं पाली के मशहूर गुलाब हलवे की.
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गुलाब हलवे की खासियत
इस मिठाई को बनाने की रेसिपी भले ही बेहद सिंपल है. इसे बनाने के लिए दूध, चीनी और थोड़ी सी इलायची का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन इसे सही तरीके से पकाने का टाइमिंग और पाली की खास जलवायु, यहां के स्थानीय कारीगरों की मेहनत, इसे खास बना देते हैं. यही वजह है कि गुलाब हलवा सालाना 20 करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यापार कर रहा है.
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कैसे हुई शुरुआत?
करीब 60 साल पहले पाली के जैन मार्केट के पास मूलचंद कास्टिया की मिठाई की दुकान हुआ करती थी. उस दौर में वहां मुख्य रूप से रबड़ी बनती थी. एक दिन जब दूध बच गया, तो उसे बेकार न जाने देने के लिए धीमी आंच पर पकाया गया. जब वह गाढ़ा होकर मावे जैसा बन गया और उसका रंग हल्का मैरून हुआ, तो ठंडा करके चखा गया. और यहीं से गुलाब हलवे की शुरुआत हुई. इसका स्वाद इतना खास था कि धीरे-धीरे यह मिठाई पूरे पाली की पहचान बन गई.
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पीएम मोदी भी कर चुके हैं जिक्र
गुलाब हलवे की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसकी तारीफ कर चुके हैं. सुमेरपुर में एक रैली के दौरान उन्होंने अपने भाषण में पाली के इस खास मिठाई का जिक्र किया था.
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हलवे की कीमत
इस हलवे का दाम भी आम लोगों की पहुंच में है. बाजार में यह 280 से 300 रुपये प्रति किलो की रेंज में बिकता है. स्वाद, सुगंध और गुणवत्ता की वजह से लोग इसे खास मौके पर तो खरीदते ही हैं, साथ ही बाहर से आने वाले लोग भी इसे पैक करवा कर अपने साथ ले जाते हैं.