Diwali 2025: सीकर का श्री कल्याण जी मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जहां लक्ष्मी और नारायण की पूजा पूरे दिन अलग-अलग होती है. 1921 में निर्मित यह मंदिर अपनी भव्यता और अखंड दीपक के लिए जाना जाता है, जो भक्तों की आस्था का प्रतीक है.
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सीकर शहर के बीचो-बीच स्थित श्री कल्याण जी मंदिर एक ऐसा अद्भुत और अनोखा धाम है, जहां दिवाली का पर्व अपनी अलग ही छटा बिखेरता है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां देवी लक्ष्मी और भगवान नारायण की पूजा पूरे दिन अलग-अलग समय पर की जाती है.
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दिवाली के दिन, जहां देशभर में लक्ष्मी-नारायण की एक साथ पूजा की जाती है, वहीं सीकर के इस मंदिर में सुबह के समय भगवान नारायण की पूजा होती है और शाम को केवल देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है. इस विशेष परंपरा के कारण ही यह मंदिर भक्तों के बीच काफी प्रसिद्ध है.
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दिवाली पर मंदिर को फूलों, रंगीन रोशनी और आकर्षक सजावट से सजाया जाता है. भक्त दूर-दूर से यहां आकर पूजा-अर्चना करते हैं. मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहता है, जिससे यहां का माहौल भक्तिमय हो जाता है.
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दिवाली की पूजा के बाद यहां विशेष प्रसाद वितरित किया जाता है, जिसे पाने के लिए श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े रहते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस प्रसाद को ग्रहण करने से घर में सुख-समृद्धि आती है.
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इस प्राचीन मंदिर का निर्माण 1921 में सीकर के तत्कालीन राव राजा कल्याण सिंह ने करवाया था. राजा कल्याण सिंह भगवान विष्णु के भक्त थे और उन्होंने यह मंदिर अपनी प्रजा और क्षेत्र की समृद्धि के लिए बनवाया था.
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मंदिर में एक अखंड दीपक जलता रहता है, जो इस बात का प्रतीक है कि यहां की शक्ति कभी कम नहीं होती. भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर इस दीपक में घी और तेल अर्पित करते हैं.
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यहां हर दिन विशेष आरती की जाती है, जिसे देखने के लिए भक्त बड़ी संख्या में इकट्ठा होते हैं. आरती का समय सुबह और शाम को तय होता है और यह भक्तों को एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है.
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