Rajasthani Gulab Churma: जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाने के लिए राजस्थान में कई तरह के पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं. इन्हीं में से एक खास और स्वादिष्ट मिठाई है गुलाब चूरमा, जो अपनी अनोखी खुशबू और स्वाद के लिए जानी जाती है.
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गुलाब चूरमा एक पारंपरिक राजस्थानी मिठाई है, जिसे खासतौर पर जन्माष्टमी जैसे त्योहारों पर बनाया जाता है. इसका नाम 'गुलाब' इसलिए है, क्योंकि इसे बनाते समय गुलाब जल या गुलाब की पंखुड़ियों का इस्तेमाल होता है, जिससे इसमें एक भीनी-भीनी खुशबू और स्वाद आता है.
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इसे बनाने के लिए गेहूं का दरदरा आटा (मोटा आटा) 2 कप, देसी घी 1 कप (और तलने के लिए), चीनी (पिसी हुई) 1 कप (या स्वादानुसार), इलायची पाउडर 1 चम्मच, गुलाब जल 1-2 चम्मच, बादाम और पिस्ता (बारीक कटे हुए) 1/4 कप, पानी आवश्यकतानुसार.
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यह दरदरे गेहूं के आटे से बनाया जाता है, जो इसे एक खास बनावट देता है. आटे को घी के साथ मिलाकर कड़ा गूंथा जाता है.
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सबसे पहले आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें घी में तलकर या ओवन में सेंककर तैयार किया जाता है, जिन्हें 'बाटी' कहते हैं. तलने के बाद इन बाटियों को तोड़कर दरदरा पीस लिया जाता है, जिससे चूरमे का खास टेक्सचर बनता है.
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इसे बनाने में भरपूर मात्रा में देसी घी, चीनी या गुड़, और सूखे मेवे जैसे बादाम-पिस्ता का उपयोग होता है, जो इसे स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाता है.
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इसमें इलायची पाउडर और मेवे मिलाने से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है, जो हर किसी को बहुत पसंद आता है.
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वैसे तो चूरमा दाल-बाटी के साथ खाया जाता है, लेकिन त्योहारों पर यह एक अकेली मिठाई के रूप में भी परोसा जाता है. जन्माष्टमी पर यह भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय भोग माना जाता है, जिसे भक्त प्रेम से प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं.
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गुलाब चूरमा सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि राजस्थान की परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है, जो हर उत्सव की रौनक बढ़ा देता है.