Rajasthan Government Project: हरियाणा और राजस्थान को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण अंबाला-कोटपूतली-नारनौल कॉरिडोर (ट्रांस-हरियाणा एक्सप्रेसवे का हिस्सा) यात्रियों, श्रद्धालुओं और व्यापारियों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रहा है.
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यह एक्सप्रेसवे हरियाणा के कुरुक्षेत्र (अंबाला के निकट) से शुरू होकर नारनौल तक जाता है और फिर राजस्थान में कोटपूतली, सीकर तथा खाटू श्याम जी क्षेत्र को सीधे कनेक्ट करता है. भारतमाला परियोजना के तहत विकसित इस 313 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड कॉरिडोर (जिसमें 227 किमी ट्रांस-हरियाणा एक्सप्रेसवे NH-152D मुख्य है) ने पहले ही दिल्ली-एनसीआर से राजस्थान की ओर ट्रैफिक को काफी हद तक डायवर्ट कर दिया है, जिससे पुराने रूट्स पर भीड़ कम हुई है.
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इस कॉरिडोर के पूरी तरह चालू होने से यात्रा समय में क्रांतिकारी बदलाव आया है. पहले दिल्ली से खाटू श्याम जी मंदिर तक का सफर 6-7 घंटे या उससे ज्यादा लगता था (NH-48 या जयपुर रूट से), लेकिन अब यह दूरी मात्र 3 से 4 घंटे में पूरी हो सकती है.
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श्रद्धालुओं के लिए यह बड़ी राहत है, क्योंकि खाटू श्याम जी जैसे प्रमुख तीर्थस्थल पर साल भर लाखों भक्त पहुंचते हैं. एक्सप्रेसवे की 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड डिजाइन, उच्च गति (120 किमी/घंटा तक) और न्यूनतम ट्रैफिक लाइट्स के कारण सफर सुरक्षित, तेज और आरामदायक हो गया है.
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कनेक्टिविटी के मामले में यह कॉरिडोर कुरुक्षेत्र-अंबाला से शुरू होकर नारनौल (हरियाणा-राजस्थान बॉर्डर) तक पहुंचता है, फिर कोटपूतली के पनियाला मोड़ से दिल्ली-जयपुर हाईवे से जुड़ता है और आगे सीकर, खाटू श्याम जी तक सुगम पहुंच प्रदान करता है.
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इससे जयपुर से चंडीगढ़ का सफर भी महज 3 घंटे में संभव हो गया है. कुल लागत करीब 9,500-11,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना ने क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बूस्ट दिया है — औद्योगिक विकास, पर्यटन और रियल एस्टेट में तेजी आई है.
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विशेषज्ञों का कहना है कि यह कॉरिडोर उत्तर भारत में कनेक्टिविटी का नया मानक स्थापित कर रहा है. आने वाले समय में इससे जुड़े अन्य प्रोजेक्ट्स (जैसे कोटपूतली-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे) के साथ खाटू श्याम जी और आसपास के इलाकों में पर्यटन और व्यापार में और वृद्धि होगी.
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यात्रियों को सलाह है कि अपडेटेड मैप और टोल जानकारी चेक करते हुए इस नए रूट का इस्तेमाल करें, ताकि समय और ईंधन दोनों की बचत हो सके.