Navratri 2025: उदयपुर का ईडाणा माता मंदिर अपने चमत्कारी अग्नि स्नान के लिए प्रसिद्ध है. नवरात्रि में यहां देवी के नौ रूपों को विशेष भोग चढ़ाए जाते हैं, जिनसे भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है.
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Navratri 2025
उदयपुर से 60 किलोमीटर दूर सलंबूर जिले में स्थित ईडाणा माता मंदिर एक ऐसा चमत्कारी धाम है, जहां देवी स्वयं अग्नि स्नान करती हैं. यहां की मान्यताएं और परंपराएं भक्तों को अचंभित करती हैं.
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Navratri 2025
ईडाणा माता को मेवल की महारानी के नाम से भी जाना जाता है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है कि यहां माता की प्रतिमा के पास अचानक आग लग जाती है, जिससे माता का श्रृंगार, वस्त्र और अन्य चढ़ावे जलकर भस्म हो जाते हैं. लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, प्रतिमा को इस अग्नि से कोई नुकसान नहीं पहुंचता. यह माना जाता है कि मां समय-समय पर भक्तों को अपने इस चमत्कारी रूप के दर्शन देती हैं. इस घटना को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं.
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ईडाणा माता
मंदिर के पीछे हजारों की संख्या में त्रिशूल लगे हुए हैं. भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर यहां त्रिशूल चढ़ाते हैं, जो इस मंदिर की एक और अनूठी परंपरा है. यह त्रिशूल भक्तों की आस्था और माता के प्रति उनकी कृतज्ञता का प्रतीक हैं.
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ईडाणा माता
नवरात्रि के दौरान, ईडाणा माता की महिमा और बढ़ जाती है. भारतीय परंपरा के अनुसार, इन नौ दिनों में देवी के नौ रूपों को विशेष भोग चढ़ाए जाते हैं:
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पहला दिन (शैलपुत्री)
नवरात्रि की शुरुआत मां शैलपुत्री की पूजा से होती है. इस दिन देवी को गाय के घी और अनार का भोग लगाया जाता है. इससे रोग और शोक दूर होते हैं.
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दूसरा दिन (ब्रह्मचारिणी)
दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को चीनी का भोग चढ़ाया जाता है. यह भोग लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद लाता है.
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तीसरा दिन (चंद्रघंटा) और चौथा दिन (कूष्मांडा)
इस दिन देवी को दूध या दूध से बनी मिठाई और केले का भोग अर्पित किया जाता है. इससे मानसिक शांति मिलती है और कष्टों से मुक्ति मिलती है. चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुआ और नाशपाती का भोग लगाया जाता है. यह भोग बुद्धि और ज्ञान का आशीर्वाद देता है.
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पांचवां दिन (स्कंदमाता) और छठा दिन (कात्यायनी)
इस दिन मां स्कंदमाता को केले और अंगूर का भोग चढ़ाएं. यह भोग संतान सुख और सुख-समृद्धि लाता है. वहीं छठे दिन मां कात्यायनी को शहद और अमरुद का भोग अर्पित किया जाता है. माना जाता है कि इससे जीवन में मिठास और प्रेम बढ़ता है.
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सातवां दिन (कालरात्रि) और आठवां दिन (महागौरी)
सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है, जिन्हें गुड़ का भोग लगाया जाता है. यह भोग सभी प्रकार के भय और नकारात्मक शक्तियों से बचाता है. आठवें दिन मां महागौरी को नारियल और शरीफा (सीताफल) का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है. इससे धन और वैभव में वृद्धि होती है.
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नौवां दिन (सिद्धिदात्री)
नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है. इस दिन देवी को खीर, हलवा और पूरी का भोग चढ़ाया जाता है, जो सभी सिद्धियों और सुखों को प्रदान करता है.
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ईडाणा माता
राजस्थान के ईडाणा माता मंदिर में भी विशेष रूप से खीर और हलवा पूरी का भोग लगाया जाता है, खासकर नवरात्रि के नौवें दिन. इसके अलावा, माता को सामान्य रूप से सेब, केला, अनार और नारियल जैसे फलों का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है. ये भोग न केवल हमारी भक्ति को दर्शाते हैं, बल्कि जीवन में खुशियों और समृद्धि का भी प्रतीक हैं. यह मंदिर आस्था, परंपरा और चमत्कार का एक अद्भुत संगम है, जो भक्तों को अपनी ओर खींचता है.
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ईडाणा माता
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