Navratri 2025: करौली के कैला देवी मंदिर में नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा हुई. भक्तों ने पीले फूल और फल चढ़ाकर रोग-मुक्ति का वरदान मांगा. लांगुरिया के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्ति से गूंज उठा.
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कैला देवी
राजस्थान के करौली जिले में, त्रिकुट की पहाड़ियों के बीच और कालीसिल नदी के तट पर स्थित प्रसिद्ध कैला देवी मंदिर में आज नवरात्रि के चौथे दिन एक विशेष भक्तिमय माहौल देखने को मिल रहा है. यह मंदिर, जिसे नौ शक्ति पीठों में से एक माना जाता है और जिसकी स्थापना लगभग 1100 ईस्वी में हुई थी, अपनी भव्यता और पवित्रता के लिए जाना जाता है.
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नवरात्रि का चौथा
नवरात्रि का चौथा दिन देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा को समर्पित है. ऐसी मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ही इस पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी. इस शुभ दिन पर कैला देवी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया.
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विशेष भोग
भक्तों ने मां को प्रसन्न करने के लिए विशेष रूप से पीले फूल, पीले वस्त्र और पीले फलों का भोग चढ़ाया. ऐसी मान्यता है कि इन वस्तुओं को अर्पित करने से देवी अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाती हैं और उन्हें रोगों से मुक्ति तथा निरोगी जीवन का वरदान देती हैं. सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर के बाहर लगी हुई थीं, हर कोई मां का आशीर्वाद पाने के लिए उत्सुक रहता है.
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लांगुरिया के जयकारे
कैला देवी मंदिर परिसर में ही हनुमान जी का भी एक मंदिर है, जिन्हें यहां के लोग प्यार से 'लांगुरिया' कहकर पुकारते हैं. इस पवित्र दिन पर भक्तों ने कैला देवी के साथ-साथ लांगुरिया के दर्शन कर भी अपनी श्रद्धा व्यक्त की. लांगुरिया के जयकारे और मां के भजन पूरे मंदिर परिसर में गूंज रहे थे, जिससे पूरा माहौल भक्ति से सराबोर हो गया.
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भक्तों का दृढ़ विश्वास
इस साल भी चैत्र माह में होने वाले विशाल मेले की तरह, यह चौथा नवरात्रिभी बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि मां कैला देवी उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं और उन्हें सुख-शांति प्रदान करती हैं.
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नवरात्रि
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