Rajasthan Tradition: राजस्थान में शोक मनाने के रिवाज अनोखे और पूरी दुनिया से काफी अलग हैं. यहां के ये रिवाज अलग-अलग जाति,और इलाकों के हिसाब से बदलते रहते हैं. ऐसे में आज हम आपको मारवाड़ी इलाके की एक ऐसी परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं, जो उस घर की बेटी को ही निभानी होती है.
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Rajasthan marwari mourning tradition
राजस्थान की मारवाड़ी लोगों में मौत के बाद कई तरह की परंपरा निभाई जाती हैं, जैसे कपड़े पहनना, खाना-पीना, खाना बनना आदि, जिसमें परिवार को कई जिम्मेदारियां निभानी होती हैं. आज हम उस परंपरा के बारे में बता रहे हैं, जो घर की बेटियों से जुड़ी हुई है.
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Rajasthan marwari mourning tradition
किसी इंसान के दाह संस्कार के बाद उस घर में खाना नहीं बनता है. कुछ दिन तक खाना रिश्तेदार और जान-पहचान वाले लोगों के घरों से आता है. जैसे पहले दिन का खाना ज्यादातर ससुराल की ओर से आता है.
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Rajasthan marwari mourning tradition
वहीं, मृत्यु के बाद पगड़ी की रस्म निभाई जाती है, जो परिवार के नए मुखिया को सम्मान देने और नई जिम्मेदारी देने का का प्रतीक मानी जाती है.
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Rajasthan marwari mourning tradition
शोक के दौरान महिलाएं सादे सफेद कपड़े पहनती हैं और सिंदूर, मंगलसूत्र जैसे सुहाग के चिन्ह नहीं पहनतीं हैं.
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Rajasthan marwari mourning tradition
वहीं, मृत्यु के बाद बेटों की तरह बेटियों से जुड़ी भी एक खास परंपरा राजस्थान में निभाई जाती है, जो बेटियों की पारिवारिक जिम्मेदारियों को दर्शाती हैं. इस दौरान बेटियां भी सादे कपड़े पहनती हैं.
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Rajasthan marwari mourning tradition
सूतक का मतलब जन्म या मृत्यु के बाद की अशुद्धि से है. मृतक के परिवारवाले 10 दिन और अंतिम संस्कार करने वाले को 12-13 दिन तक सूतक का पालन करना होता है. यह सूतक वैसे सवा महीने तक का होता है. इस दौरान लोग किसी के घर नहीं जाते हैं लेकिन बेटियां जा सकती हैं.
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Rajasthan marwari mourning tradition
किसी इंसान की मृत्यु के बाद बेटा एक नित्य पिंडदान करता है. इस दौरान क्रिया करने वाले बेटे के खाने-पीने की पूरी व्यवस्था घर की किसी बेटी को निभानी होती है. उसके हाथ से बना खाना परोसा जाता है. कहते हैं कि क्रिया में बैठने वाले बेटे का परोसा खाना मृत आत्मा तक पहुंचता है. (डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी और लोगों द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.)