Aravalli Mining Consequences: सुप्रीम कोर्ट के अरावली पर फैसले के बाद राजस्थान में पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ गई है. विशेषज्ञों के अनुसार अरावली कमजोर हुई तो पानी, जंगल, खेती, स्वास्थ्य और पर्यटन पर गंभीर असर पड़ेगा. आज जो कल्पना लगती है, वह भविष्य की हकीकत बन सकती है.
1/9
Aravalli Mining News
सुप्रीम कोर्ट के अरावली को लेकर आए हालिया फैसले के बाद से राजस्थान में एक नई बहस छिड़ गई है. पर्यावरण, पानी, जंगल और भविष्य की पीढ़ियों को लेकर लोगों की चिंता अचानक तेज हो गई है. अरावली केवल पहाड़ियों की एक श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाती है. यही पर्वत श्रंखला रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोकती है, बारिश को थामती है और हवा में नमी बनाए रखती है. लेकिन नई परिभाषा के बाद यह डर गहराने लगा है कि अगर अरावली का संरक्षण कमजोर हुआ, तो इसका असर पूरे प्रदेश पर पड़ेगा. आज जो बातें मजाक या कल्पना लगती हैं, वे आने वाले वर्षों में डरावनी सच्चाई बन सकती हैं.
2/9
Aravalli Mining News
अगर अरावली धीरे-धीरे खत्म होती है तो इसका सबसे पहला असर पर्यटन पर दिखाई देगा. झीलों की नगरी उदयपुर, जो आज अपनी खूबसूरत झीलों और हरियाली के लिए दुनिया भर में मशहूर है, वहां पानी की जगह सूखे की दरारें दिख सकती हैं. झीलों में पानी नहीं रहेगा, तो पर्यटक भी नहीं आएंगे. पर्यटन पर निर्भर हजारों परिवारों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी. इसी तरह गुलाबी नगरी जयपुर, जो अपनी साफ हवा और ऐतिहासिक पहचान के लिए जानी जाती है, वहां धूल और प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ सकता है कि शहर का रंग ही बदल जाए. गुलाबी शहर धूल से पीला नजर आने लगेगा.
3/9
Aravalli Mining News
अरावली के कमजोर होने का असर तापमान पर भी पड़ेगा. सूर्यनगरी जोधपुर में पहले ही गर्मी का प्रकोप रहता है, लेकिन अरावली के बिना हालात और बिगड़ सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. तेज लू और धूलभरी आंधियां आम हो जाएंगी. इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ेगा. सांस से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ेंगी. हालात ऐसे बन सकते हैं कि अस्पतालों में जगह कम पड़ जाए. बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए जीना और भी मुश्किल हो जाएगा.
4/9
Aravalli Mining News
एनवायरमेंट एक्सपर्ट पद्म श्री श्याम सुंदर पालीवाल का कहना है कि अरावली रेगिस्तान की रेत को रोकने वाली एक मजबूत दीवार है. अगर यह दीवार कमजोर हुई, तो थार की महीन रेत सीधे शहरों तक पहुंचेगी. हवा में हर समय धूल तैरती रहेगी. ऐसे हालात में ऑक्सीजन मास्क जिंदगी का हिस्सा बन सकता है. लोगों को बाहर निकलते समय मास्क और जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन सिलेंडर तक साथ रखना पड़ सकता है. यह स्थिति केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक संकट भी पैदा करेगी.
5/9
Aravalli Mining News
प्रदूषण का खतरा भी कई गुना बढ़ जाएगा. दिल्ली के नजदीक होने के कारण राजस्थान पहले ही प्रदूषण के असर को झेल रहा है. अरावली खत्म होने पर हवा में PM2.5 और PM10 जैसे खतरनाक कण बढ़ जाएंगे. सांस लेना मुश्किल हो जाएगा. अस्थमा, फेफड़ों और दिल से जुड़ी बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ेंगे. बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. मरीजों की संख्या इतनी अधिक हो सकती है कि मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाएं नाकाफी साबित हों.
6/9
Aravalli Mining News
जंगलों और वन्यजीवों पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा. अरावली ही जंगलों का आधार है. यही पहाड़ियां मिट्टी को थामे रखती हैं और नमी बनाए रखती हैं. अगर अरावली कमजोर हुई, तो मिट्टी का कटाव बढ़ेगा, बारिश कम होगी और जंगल धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगे. सरिस्का जैसे टाइगर रिजर्व में जंगल नहीं बचेंगे. बाघ केवल तस्वीरों और किताबों में नजर आएंगे. जंगल खत्म होने का मतलब है जैव विविधता का खत्म होना और प्रकृति का संतुलन बिगड़ना.
7/9
Aravalli Mining News
पानी की स्थिति और भी भयावह हो सकती है. अरावली झीलों और भूजल रिचार्ज का बड़ा आधार है. इसके बिना बारिश का पानी रुकने की बजाय बह जाएगा. नालों और धाराओं का प्राकृतिक प्रवाह टूट जाएगा. जंगल खत्म होने से बारिश और कम होगी. बढ़ती गर्मी के कारण पानी का वाष्पीकरण बढ़ेगा और झीलें धीरे-धीरे सूख जाएंगी. अजमेर की आना सागर झील जैसे हालात बन सकते हैं, जहां पानी इतना कम हो जाए कि लोगों को पीने का पानी खरीदना पड़े. खेती पर निर्भर इलाकों में जमीन बंजर हो सकती है, जिससे किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे.
8/9
Aravalli Mining News
अरावली राजस्थान के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है. यह रेगिस्तान से आने वाली गर्म और धूलभरी हवाओं को रोकती है. अगर यह कवच हट गया, तो दिनभर धूल के तूफान चलते रहेंगे. हरियाली घटेगी, बारिश अनियमित होगी और हीटवेव का असर बढ़ेगा. कोटा जैसे शहर, जो एजुकेशन हब के रूप में जाने जाते हैं, वहां बच्चों को ऑक्सीजन मास्क लगाकर स्कूल जाना पड़े, ऐसी स्थिति की कल्पना भी डराती है. यह केवल पर्यावरण की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की चिंता है.
9/9
Aravalli Mining News
अरावली को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहाड़ियों की नई परिभाषा को मंजूरी दी गई है. इस परिभाषा के अनुसार आसपास की जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली भू-आकृति को ही अरावली पहाड़ी माना जाएगा. इस मानक से अरावली की 90 प्रतिशत से ज्यादा पहाड़ियां संरक्षण के दायरे से बाहर हो सकती हैं. इसका सीधा असर खनन, रियल एस्टेट और निर्माण गतिविधियों पर पड़ेगा. हालांकि पद्म श्री श्याम सुंदर पालीवाल को उम्मीद है कि अरावली में खनन नहीं होगा. उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सरकार का रुख सकारात्मक है और अरावली पूरी तरह सुरक्षित रहेगी. लेकिन सवाल यही है कि क्या यह भरोसा भविष्य की चुनौतियों के सामने टिक पाएगा, यह समय ही बताएगा.