Shri Jadkhor Godham: नेपाल में Gen Z ने उपद्रव किया, जबकि भारत में श्री जड़खोर गोधाम में Gen Z ब्रह्मचारियों को वैदिक परंपरा, संस्कार, वेद अध्ययन और राष्ट्र-रक्षा की शिक्षा दी जा रही है. राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा ने आज डीग स्थित इस धाम में आज पहुंचे. जानिए गोधाम की खासियत.
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जहां दुनियाभर की Gen Z मोबाइल और सोशल मीडिया में गुम हो रही है, वहीं नेपाल में Gen Z ने अपने ही देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और उपद्रव व तांडव मचाया. इसके विपरीत भारत में एक ऐसी Gen Z पीढ़ी भी है, जो भारतीय संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रहकर दिन-रात संस्कारवान बनने की ओर कदम बढ़ा रही है, शास्त्रों का ज्ञान अर्जित कर रही है और वेदों से विद्या प्राप्त कर रही है. इस पीढ़ी की कठोर दिनचर्या के आगे सब कुछ फीका नजर आता है और प्रधानमंत्री मोदी के "बुलंद भारत" की बुलंद तस्वीर दिखाई देती है.
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इस Gen Z पीढ़ी को नैतिकता, धर्म, संस्कृति और मूल्य सिखा रहा है डीग के श्री जड़खोर गोधाम में संचालित श्री गेणशदास भक्तमाली वेद विद्यालय. यहां वैदिक परंपरा से शिक्षा प्राप्त कर रहे बटुक ब्रह्मचारियों को भारत की संस्कृति, परंपराओं और रक्षार्थ तैयार किया जा रहा है. ब्रह्ममुहूर्त में उठना, गो सेवा करना, यज्ञ और हवन के साथ नियमित सूर्य उपासना तथा वेद मंत्रोच्चारण का अभ्यास उनकी दिनचर्या का हिस्सा है.
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यहां शिक्षा ले रहे बच्चों के लिए जिम से अधिक योग और शारीरिक व्यायाम को स्वास्थ्य का आधार बनाया गया है. सात वर्षीय पाठ्यक्रम के तहत बच्चे यहीं श्री जड़खोर गोधाम में रहते हैं. इन्हें बटुक ब्रह्मचारी कहा जाता है. छठी से बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें संस्कारयुक्त वेदाधारित शिक्षा दी जाती है.
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विशेष अनुभवी आचार्य वेद, संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी और गणित पढ़ाते हैं और बच्चों को राष्ट्र रक्षक तथा सनातन रक्षक के रूप में तैयार करते हैं. श्रीरैवासा धाम के अग्रपीठाधीश्वर, वृंदावन धाम के श्रीमलूक पीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेन्द्र दास जी महाराज के मार्गदर्शन में यहां निशुल्क शिक्षा दी जाती है.
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स्वामी श्री राजेन्द्र दास जी महाराज का कहना है कि "हमारा उद्देश्य विलुप्त होती सनातन संस्कृति की रक्षा करना है. हम एक पथभ्रष्ट भावी पीढ़ी के बजाय संस्कारवान युवा शक्ति का निर्माण करना चाहते हैं, जो भविष्य में गो भक्त, संत भक्त, राष्ट्र भक्त, राष्ट्र रक्षक और सनातन संस्कृति के संवाहक बनें. जिस भी समय देश को इन युवाओं की आवश्यकता हो, वे सबसे आगे खड़े हों."
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इस शिक्षा मंदिर में मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी जैसी चीजें पूरी तरह प्रतिबंधित हैं. बच्चों को सप्ताह में केवल एक बार अभिभावकों से फोन पर बात करने की अनुमति होती है और माह में एक बार माता-पिता उनसे मिल सकते हैं.
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सुबह 4 बजे उठना, प्रार्थना, वेद अभ्यास, सफाई, योग, ध्यान और पारंपरिक खेल उनकी दिनचर्या का हिस्सा है. सूर्य नमस्कार, दो वक्त हवन, त्रिकाल संध्या आरती और गायत्री उपासना प्रतिदिन कराई जाती है. बच्चों में आत्मबल, दया, करुणा और कृतज्ञता का भाव विकसित करने के लिए विशेष अभ्यास भी कराया जाता है. साथ ही, गो सेवा अनिवार्य है.
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इतना ही नहीं विद्यालय में गोवृति प्रसाद को प्राथमिकता दी जाती है. मांस, मदिरा, बर्गर, पिज़्ज़ा और किसी भी प्रकार के व्यसन पर पूर्ण प्रतिबंध है. सात्विक भोजन ही उनके जीवन का आधार है.