Janmashtami 2025: राजस्थान में जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जाती है. सिरोही में तालाब पूजन, भगवान को छप्पन भोग, खीरा काटना और विशेष पूजा-अर्चना जैसी अनूठी परंपराएं निभाई जाती हैं. मंदिरों में भजन-कीर्तन, झांकियां और भक्तिमय माहौल से उत्सव खास बनता है.
1/8
जन्माष्टमी
राजस्थान में हर त्योहार सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं होता, बल्कि पूरे समाज को जोड़ने वाला उत्सव बन जाता है. इन्हीं खास त्योहारों में से एक जन्माष्टमी है. जिसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है.
2/8
भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को लिया था जन्म
जन्माष्टमी का महत्व सिर्फ धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी बेहद खास है. मान्यता है कि भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को आधी रात में भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा में अवतार लिया था. इस दिन मंदिरों में विशेष सजावट, पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन होते हैं. राजस्थान में तो यह त्योहार अपनी अनूठी परंपराओं के लिए और भी यादगार बन जाता है.
3/8
तालाब पूजन: भाई-बहन के रिश्ते की अनोखी रस्म
सिरोही जिले में जन्माष्टमी पर एक विशेष परंपरा निभाई जाती है जिसे "तालाब पूजन" कहा जाता है. इसमें बहनें तालाब में उतरकर उसकी पूजा करती हैं और अपने भाइयों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करती हैं. यह परंपरा भाई-बहन के पवित्र रिश्ते में भक्ति और आशीर्वाद का रंग भर देती है.
4/8
छप्पन भोग: भक्ति में स्वाद का संगम
जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है, जिसे "छप्पन भोग" कहा जाता है. इसमें मिठाइयों से लेकर फल, पकवान और स्नैक्स तक, हर स्वाद शामिल होता है. भक्तजन इसे बड़े प्रेम से तैयार करते हैं और मंदिरों में भगवान को अर्पित करने के बाद प्रसाद के रूप में वितरित करते हैं.
5/8
खीरा काटना: जन्म का प्रतीक
राजस्थान में जन्माष्टमी की रात 12 बजे, जब भगवान कृष्ण के जन्म का समय होता है, एक खास रस्म "खीरा काटना" निभाई जाती है. इसमें खीरे को बीच से काटकर, उसमें से लड्डू गोपाल को बाहर निकाला जाता है. यह रस्म भगवान के जन्म का प्रतीक है और इसके साथ ही मंदिरों में घंटियां, शंख और जयकारों की गूंज से माहौल भक्तिमय हो जाता है.
6/8
विशेष पूजा-अर्चना: मंदिरों की रौनक
उदयपुर का जगदीश मंदिर और जयपुर का राधा दामोदर मंदिर जन्माष्टमी पर विशेष भक्ति-उत्सव के लिए प्रसिद्ध हैं. यहां भक्तजन रातभर भजन-कीर्तन करते हैं, जागरण होता है और सुंदर झांकियां सजाई जाती हैं.
7/8
श्रद्धा का प्रतीक
भजन, कीर्तन, नृत्य और झूलों से सजी जन्माष्टमी, राजस्थान में न सिर्फ धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि यह समाज को एक साथ लाने वाला उत्सव भी है. इस दिन हर घर में खुशी, उल्लास और भगवान श्रीकृष्ण की मधुर बांसुरी की धुन गूंजती है, जो भक्तों के दिलों में भक्ति और प्रेम भर देती है.
8/8
Disclaimer
प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. Zee Rajasthan इसकी पुष्टि नहीं करता है.