Pushkar International Mela: अंतर्राष्ट्रीय पुष्कर मेले में करोड़ों के घोड़े “शाबाज” और “बादल” बने आकर्षण का केंद्र बना रहा है. पंजाब-राजस्थान के पशुपालक अपने शाही टेंटों संग पहुंचे. विदेशी सैलानियों ने कहा पुष्कर सिर्फ पशु मेला नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक है.
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15 Crores Horse
अंतर्राष्ट्रीय पुष्कर मेला इस समय अपने पूरे शबाब पर है. रेतीले नए मेला मैदान में घोड़ों, ऊंटों और पशुपालकों की रौनक देखते ही बन रही है. हर ओर पशुओं की सजावट, चमकती काठी और शाही ठाठ-बाट से माहौल एक उत्सव में बदल गया है.
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पंजाब, हरियाणा, बीकानेर और राजस्थान के अन्य जिलों से आए हजारों पशुपालक अपने लग्जरी टेंटों में डेरा जमाए हुए हैं. टेंटों के बाहर लग्जरी गाड़ियां और भीतर लाखों-करोड़ों के घोड़े, मेला मैदान को किसी शाही दरबार का रूप दे रहे हैं.
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इस बार मेले का सबसे बड़ा आकर्षण बना है केकड़ी के अश्वपालक राहुल जेतवाल का घोड़ा बादल, जिसकी कीमत 11 करोड़ रुपये आंकी गई है. मात्र पांच साल के इस सफेद घोड़े की ऊंचाई 68 इंच से अधिक है और यह नुगरा नस्ल का है. अब तक यह 285 बच्चों का पिता बन चुका है और फिलहाल इसकी 120 घोड़ियां गर्भवती हैं. राहुल जेतवाल ने बताया, “बादल हमारे परिवार का हिस्सा है, इसे बेचने नहीं, केवल प्रदर्शन के लिए लाए हैं.”
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वहीं पंजाब के पशुपालक गेरी सिंह अपने 15 करोड़ रुपये के घोड़े शाबाज के साथ पहुंचे हैं. शाबाज अब तक 6 शो जीत चुका है और इसकी ब्रीडिंग फीस 2 लाख रुपये तक जाती है. गेरी ने बताया कि “शाबाज की हाइट 65 इंच है, और अब तक इसे 9 करोड़ की बोली मिल चुकी है, लेकिन असली कीमत 15 करोड़ है.”
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वे हर साल अपने करीब 40 घोड़े लेकर पुष्कर आते हैं. इस बार उनके अन्य नामचीन घोड़े “भारत ध्वज”, “दबंग” और “नागेश्वर” भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.
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अमेरिका और यूरोप से आए पर्यटकों ने कहा कि पुष्कर मेला केवल पशु व्यापार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पशु प्रेम और लोक परंपरा का जीवंत प्रतीक है. यह अनुभव उनके लिए अविस्मरणीय रहेगा.
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अब तक पुष्कर मेले में 3021 पशु पहुंच चुके हैं, जिनमें 2102 घोड़े और 917 ऊंट शामिल हैं. रेतीली धूप में गूंजती मोलभाव की आवाजें, घोड़ों की सजावट और लोक संगीत की धुनें मिलकर पुष्कर को एक शाही उत्सव में बदल रही हैं. जहां हर ओर राजस्थान की शान और परंपरा का गर्व झलक रहा है.