Sawai Madhopur News: रणथंभौर में बाघों की संख्या अधिक (78) होने से टेरेटरी को लेकर वर्चस्व की जंग चल रही है. क्षेत्रफल की कमी और नर-मादा अनुपात में गड़बड़ी मुख्य वजह है, जो पर्यटकों के लिए रोमांचक है.
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रणथंभौर टाइगर रिजर्व
सवाई माधोपुर प्रदेश के सबसे बड़े रणथंभौर टाइगर रिजर्व में इन दिनों बाघों के बीच वर्चस्व की खूनी जंग चल रही है. अपने इलाके (टेरेटरी) पर नियंत्रण और मादा के लिए बाघों में आए दिन टकराव देखने को मिल रहा है.
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पूरा जंगल दहाड़ों से गूंजा
इस संघर्ष से न केवल पूरा जंगल दहाड़ों से गूंज रहा है, बल्कि रणथंभौर भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों को भी बाघों के टकराव का रोमांचकारी नज़ारा देखने को मिल रहा है. हाल ही में, जोन नंबर तीन में मां (रिद्धि T-124) और बेटी (मीरा) के बीच टेरेटरी को लेकर जबरदस्त संघर्ष हुआ, जिसने वन्यजीव प्रेमियों को चौंका दिया.
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क्यों हो रहा है बाघों के बीच यह टकराव
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, रणथंभौर में बाघों के बीच बढ़ते संघर्ष का मुख्य कारण है सीमित क्षेत्रफल में बाघों की अत्यधिक संख्या.रणथंभौर टाइगर रिजर्व 1334 वर्ग किलोमीटर में फैला है, लेकिन बाघों का वास्तविक विचरण क्षेत्र केवल 939.14 वर्ग किलोमीटर है.
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अत्यधिक आबादी
वर्तमान में रणथंभौर में लगभग 78 बाघ, बाघिन और शावक हैं, जबकि वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक इस क्षेत्र में अधिकतम 55 से 56 बाघ ही रह सकते हैं.
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कम इलाका
वन्यजीव विशेषज्ञों (जैसे धर्मेंद्र खांडल) के अनुसार, रणथंभौर में वर्तमान में एक बाघ को महज 14 से 15 वर्ग किलोमीटर का इलाका मिल पा रहा है, जबकि एक नर बाघ को आमतौर पर 20 से 60 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की आवश्यकता होती है. इस कमी के कारण बाघ एक-दूसरे की टेरेटरी को ओवरलैप कर रहे हैं.
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वन्यजीव विशेषज्ञ
वन्यजीव विशेषज्ञ यादवेन्द्र सिंह (अध्यक्ष, नेचर गाइड एसोसिएशन) ने बताया कि रणथंभौर देश का सबसे घनी बाघ आबादी वाला टाइगर रिजर्व बन गया है.
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संघर्ष के दो मुख्य कारण
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, बाघों के बीच खूनी संघर्ष होने के दो मुख्य कारण हैं-
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टेरेटरी पर कब्ज़ा
जब कोई युवा बाघ या बाघिन जवान होते हैं, तो उन्हें अपनी मां से अलग होकर अपने लिए नई टेरेटरी बनानी होती है. इसी क्रम में सबसे पहले उनका संघर्ष अपनी मां से होता है (जैसा कि मां रिद्धि और बेटी मीरा के बीच हुआ).
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टेरेटरी की जंग
मां के साथ संघर्ष आमतौर पर जानलेवा नहीं होता. हालांकि, किसी अन्य वयस्क बाघ या बाघिन के साथ टेरेटरी की जंग बहुत खतरनाक हो सकती है, जिसमें कमजोर बाघ की मौत तक हो जाती है. जंगल का नियम यही है कि कब्ज़ा ताकतवर का होता है.
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मादा के लिए संघर्ष
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, एक नर बाघ को दो से तीन मादा बाघिन की जरूरत होती है. लेकिन रणथंभौर में नर और मादा का अनुपात (रेशो) बिल्कुल गड़बड़ा गया है.वर्तमान में यहां लगभग एक नर पर एक ही मादा का अनुपात है (24 नर, 25 मादा, 29 शावक), जिसके चलते मादा पर अधिकार को लेकर बाघों में अक्सर संघर्ष देखने को मिलता है.
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वन विभाग का रुख
रणथंभौर के डीएफओ रामानंद भाकर ने बताया कि बाघों के बीच संघर्ष होना वाइल्डलाइफ़ का हिस्सा है और इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है. हालांकि, वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जगह की कमी के चलते यह टकराव बढ़ रहा है, तो सरकार और वन विभाग की जिम्मेदारी है कि वे बाघों को पर्याप्त जगह उपलब्ध कराएं ताकि टेरेटरी का ओवरलैप कम हो सके.
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पर्यटकों के लिए रोमांचक नज़ारा
बाघों के बीच यह आपसी टकराव भले ही गंभीर हो, लेकिन रणथंभौर भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों के लिए यह रोमांच का विषय बन जाता है. यहां पर्यटकों को कई बार बाघ और भालू या बाघ और मगरमच्छ के बीच भी संघर्ष देखने को मिल जाता है.