Jaipur News: सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर के सांगानेर क्षेत्र की 86 कॉलोनियों को अतिक्रमण मानते हुए हटाने का आदेश दिया. हजारों परिवारों में डर फैल गया है. कॉलोनी विकास समितियां अब कोर्ट में पिटीशन दायर कर फैसले को चुनौती देंगी.
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Illegal Colonies Sanganer
राजधानी जयपुर के सांगानेर क्षेत्र में स्थित 86 कॉलोनियों के हजारों परिवारों में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने हड़कंप मचा दिया है. कोर्ट ने इन कॉलोनियों को अतिक्रमण मानते हुए हाउसिंग बोर्ड को निर्देश दिया कि यह क्षेत्र पूरी तरह खाली कराया जाए. इस आदेश के बाद कॉलोनी वासियों की नींद उड़ी हुई है और वे अब इस फैसले को चुनौती देने के लिए एकजुट हो गए हैं.
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सांगानेर की 86 कॉलोनियों में कई दशक से लोग रह रहे हैं. इनमें नगर निगम द्वारा नल, बिजली, पानी और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास भी किया गया है. सरकार पहले इन कॉलोनियों को नियमित करने की कोशिश कर रही थी. बावजूद इसके सुप्रीम कोर्ट ने इन कॉलोनियों को अतिक्रमण मानते हुए एलपीसी को खारिज कर दिया.
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कॉलोनी वासियों में डर का माहौल है. अब विभिन्न कॉलोनी विकास समितियां अपने पदाधिकारियों के नेतृत्व में लामबंद हो गई हैं. आज गोविंद नगर, आजाद नगर, अंबिका कॉलोनी, तिरुपति बालाजी नगर, बेरवा कॉलोनी, शशि विहार कॉलोनी, धाकड़ कॉलोनी, गोकुलपुरी, मारुति नगर और रघुनाथ पुरी सहित करीब एक दर्जन कॉलोनियों के पदाधिकारी और आमजन बैठक में शामिल हुए.
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बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि वे कोर्ट में पिटीशन दायर करेंगे और अलग-अलग अधिवक्ताओं के माध्यम से अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे. इसके साथ ही सरकार को इस मामले में बचाव के लिए ज्ञापन भी सौंपा जाएगा.
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कॉलोनी वासियों का कहना है कि वे दशकों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और मूलभूत सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं. अचानक सुप्रीम कोर्ट का यह फरमान उनके लिए चिंता और अनिश्चितता का कारण बन गया है.
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विकास समितियों ने कहा कि वे कानूनी रास्ता अपनाकर अपने अधिकारों की रक्षा करेंगे और कॉलोनियों के घरों को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे.
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मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है. माना जा रहा है कि कोर्ट के आदेश के बाद हाउसिंग बोर्ड और अन्य सरकारी विभाग इस आदेश को लागू कराने की दिशा में कदम उठा सकते हैं. ऐसे में कॉलोनी वासियों की लड़ाई अब न्यायालय में जारी रहेगी.