Churu News: चूरू के गोगामेड़ी मेले में भक्तों ने सर्पों संग हैरतअंगेज करतब दिखाए, जो उनकी अटूट आस्था और साहस का प्रतीक है. यह मेला भक्ति, साहस और रोमांच का अद्भुत संगम बन गया.
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भक्ति और हैरत का अनोखा संगम
Churu News: राजस्थान के चूरू में इस बार तेजा दशमी और गोगामेड़ी मेले का आयोजन एक जादुई उत्सव में बदल गया. यह मेला केवल मंदिरों की घंटियों और लोकगीतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहां भक्ति, साहस और हैरतअंगेज दृश्यों का ऐसा संगम दिखा, जिसने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया.
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डर नहीं, सिर्फ अटूट आस्था
मेले में देर रात तक चलते भक्ति महाकुंभ के बीच, हजारों की भीड़ के सामने अचानक कुछ भक्त अपने निशानों के साथ आए. उनके हाथों और गले में थे जहरीले सांप और गोयरा. भक्तों ने बिना किसी डर के उन्हें गले लगाया, हाथों पर लहराया और ढोल-ताशों की धुन पर उनके साथ नाचते-थिरकते रहे. एक भक्त ने तो अजगर को गले की माला बना लिया और किसी ने फन उठाए नाग को हथेली पर सजाकर दिखाया, जिसे देखकर लोग अपनी आंखें मलते रह गए.
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अनोखी आस्था
भक्तों की इस अनोखी आस्था में डर कहीं भी दिखाई नहीं दिया. उनका मानना था कि यह सब बाबा गोगाजी और वीर तेजाजी महाराज की कृपा से ही संभव है. यह मेला साबित कर गया कि यहां की परंपराएं सिर्फ श्रद्धा का प्रतीक नहीं, बल्कि साहस और अटूट आस्था का भी संगम हैं.
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पूरा शहर गूंज उठा जयकारों से
जब हजारों की भीड़ ने एक स्वर में 'जय गोगाजी! जय तेजाजी!' का जयकारा लगाया, तो पूरा चूरू गूंज उठा. यह मेला एक बार फिर यह दिखा गया कि राजस्थान की संस्कृति में भक्ति और बहादुरी का मेल कितना गहरा है.
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मेला
जब हजारों की भीड़ ने एक स्वर में 'जय गोगाजी! जय तेजाजी!' का जयकारा लगाया, तो पूरा चूरू गूंज उठा. यह मेला एक बार फिर यह दिखा गया कि राजस्थान की संस्कृति में भक्ति और बहादुरी का मेल कितना गहरा है.