Diwali 2025: दिवाली खुशियों और रोशी का त्योहार है, जो पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है. लेकिन कई पटाखों की वजह से कई तरह के हादसे हो जाते हैं. ऐसे में जानिए 10 टिप्स टू सेफ दिवाली.
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आप एक बेसिक फर्स्ट एड किट रखकर किसी बड़ी समस्या को शुरू में संभाल सकते हैं. इस किट में आप कैलामाइन लोशन, हाइड्रोकार्टिसोन क्रीम, मेडिकल टेप, डिस्पोजेबल ग्लव्स, स्टरलाइज्ड पट्टी, अल्कोहल वाइप्स, बैंड-एड जैसे सामान जरूर रखें. अगर किसी को चोट लग जाएं, तो ये आपके काम आ सकती है.
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ध्यान रखें कि दिवाली पर सुरक्षित रहने के लिए केवल भरोसेमंद और लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही पटाखें लें. साथ बच्चों को अकेले पटाखें ना जलाने दें.
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इसके अलावा पटाखे जलाने से पहले सेफ्टी ग्लास का इस्तेमाल करें. एक बार में सिर्फ एक पटाखा जलाएं और तुरंत दूर हटें.
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पटाखे खुले और साफ मैदान में जलाएं, घर या कारों के पास नहीं, जो पटाखा एक बार बुझ जाए, उसे दोबारा जलाने की कोशिश न करें. साथ ही 20 मिनट बाद उसे पानी में भिगो दें.
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यदि जलने का कोई हादसा हो जाए तो पहले आग को तुरंत बुझाएं और व्यक्ति को उस जगह से हटाएं. फिर हल्की जलन होने पर ठंडा पानी डालें और साफ पट्टी बांधे.
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ध्यान रखें कि आंख में चोट होने पर खुद इलाज करने की कोशिश न करें और न आंख मलें, न पानी डालें और न कोई जेल या मरहम लगाएं. सीधे डॉक्टर के पास ले जाएं.
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पटाखों की वजह होने वाले हादसों में सबसे अधिक चोटें चेहरे, आंखों और हाथों पर होती हैं. छोटे बच्चों (0 से 6 वर्ष) में चेहरे की चोटें आम हैं, जबकि 10 से 16 साल के किशोरों में हाथ और उंगलियां सबसे अधिक लगती हैं.
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वहीं, 22 साल से अधिक उम्र वालों में पैर और टांगों की चोटें ज्यादा लगती हैं. पटाखों से होने वाले हादसों में जलन, कटाव, खरोंच और कई बार दृष्टि चली जैसी घटना हो सकती हैं. (डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.)