Ajmer News: राजस्थान के अजमेर जिले के शोकलिया गांव के 200 घर 20 दिनों से पानी में डूबे हैं. सांप-बिच्छू के डर, पशुधन की मौत, बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं की परेशानी से हालात नरकीय बने हुए हैं. प्रशासन की अनदेखी से ग्रामीण आक्रोशित, चुनाव बहिष्कार व आंदोलन की चेतावनी दी.
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शोकलिया गांव में हालात बदतर
राजस्थान के अजमेर जिले के केकड़ी सरवाड़ उपखंड के शोकलिया गांव में हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं. गांव के करीब 150 से 200 घर पिछले 20 दिनों से पानी में डूबे हुए हैं. घरों और पशुओं के बाड़ों में पानी भरे रहने से ग्रामीण नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं. लगातार जलभराव के कारण घरों में सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीव-जंतु घुस आए हैं, जिससे कई परिवार पलायन कर चुके हैं.
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पंचायत चुनावों का बहिष्कार का ऐलान
ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया और राजस्थान सरकार के हेल्पलाइन नंबर पर भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उनकी कहीं सुनवाई नहीं हुई. इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने आंदोलन का अल्टीमेटम देते हुए लोकसभा, विधानसभा, जिला परिषद, पंचायत समिति और पंचायत चुनावों का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है. गांववासियों का कहना है कि “राम के साथ अब राज भी रूठ गया, हम आखिर किससे उम्मीद करें.”
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20 दिनों से भरा हुआ है पानी
केकड़ी विधानसभा क्षेत्र में चार दिन पहले बरसात थम गई और अधिकांश इलाकों में जनजीवन सामान्य हो चुका है. बंद पड़े हाईवे भी बहाल हो गए, लेकिन शोकलिया गांव के हालात अब भी पहले जैसे ही हैं. यहां 20 दिनों से घरों और बाड़ों में पानी भरा हुआ है, जिससे पशुधन की मौतें शुरू हो गई हैं. पशुपालक अपने जानवरों को तड़पते देख आंसू बहा रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई सरकारी सहायता नहीं मिल रही. गांव की आबादी में बने घरों के बावजूद ग्रामीण बदहाल जिंदगी जी रहे हैं. बिना पानी निकासी के यहां से पानी निकलना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है. यहां के लोगों का जीवन बेपटरी हो गया है. आंखों की नींद गायब है, क्योंकि कब क्या हो जाए, इस अनहोनी के डर से नींद नहीं आती. स्थानीय लोगों को अब प्रशासन से आश नहीं रही, जिसके चलते लोग मंदिर में देवी-देवताओं की शरण में प्रार्थना करते नजर आते हैं. उनको अब सिर्फ भगवान से उम्मीद है.
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जहरीले जीव-जंतुओं के बीच रहने को मजबूर
लगातार जलभराव से कई परिवार अपने घर छोड़कर अन्यत्र चले गए हैं. घरों में सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीव-जंतुओं ने अपना आशियाना बना लिया है. ग्रामीणों का कहना है कि लगातार घरों में पानी भरा हुआ है. बार-बार अधिकारियों को कह रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है. जिसके चलते घरों में सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतु आने लगे हैं. अनहोनी के डर से घरों को खाली कर दिया है. परिवार में छोटे-छोटे बच्चे और महिलाएं हैं, जिनके साथ कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है. लोगों का कहना है कि जिंदा रहेंगे तो और घर बना लेंगे, लेकिन जिंदा ही नहीं रहेंगे तो घरों का क्या करेंगे. आम रास्ता जलमग्न है. वहीं जलदाय विभाग की पानी की टंकी भी बरसात के पानी में डूब चुकी है. गांव के ऊपरी हिस्से सोसायटी की तरफ और निचले हिस्से पथवारी की तरफ सैकड़ों घर जलमग्न हैं. अब तो धीरे-धीरे मौसमी बीमारियों का फैलने का खतरा बन गया है, क्योंकि लगातार पानी भरा रहने से पशुओं की मौतें होने लग गई हैं.
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4 से 5 फीट भरा है पानी
गांव की कालोनी से रोजाना 30 से 40 बच्चे-बच्चियां स्कूल जाते हैं, लेकिन रास्ते में 4 से 5 फीट तक पानी भरा हुआ है. हादसे की आशंका को देखते हुए अभिभावक रोजाना बच्चों को ट्रैक्टर में बैठाकर स्कूल छोड़ने और वापस लाने जाते हैं. बावजूद इसके हर दिन किसी अनहोनी का डर बना रहता है. अब तो धीरे-धीरे बच्चे भी डर के मारे स्कूल जाने से इनकार करने लगे हैं, क्योंकि रोजाना गहरे पानी से स्कूल जाना और वापस आना उनको खतरा लगने लगा है. छात्र-छात्राओं के साथ कभी भी बरसात के पानी से अनहोनी घटना घटित हो सकती है. सबसे ज्यादा तकलीफ ग्रामीण परिवेश में रहने वाली महिलाओं को हो रही है. महिलाएं जब पानी से गुजरती हैं तो उनको अपने कपड़े ऊपर करके निकलना पड़ता है, जिसके चलते उनको बड़ी शर्म महसूस होती है. लेकिन मजबूरी के चलते पानी से निकलना पड़ रहा है. जहां एक तरफ महिला उत्थान की बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाएं शर्मसार हो रही हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. आखिर क्यों?
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पशुधन की जान का बना हुआ है खतरा
शोकलिया गौशाला की 500 से अधिक गायें इसी रास्ते से चरागाह तक जाती हैं. वहीं गांव का समूचा पशुधन – भेड़, बकरी, गाय और भैंस – भी इसी रास्ते से जंगल की ओर चरने जाता है. पानी गहरा होने के चलते भेड़-बकरियों को पकड़ कर निकालना पड़ता है. सैकड़ों पशुओं को निकालना पशुपालकों के लिए आफत बन गया है. जलभराव के कारण पशुपालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. लगातार बाड़ों में पानी भरा रहने से पशुओं में बीमारी का खतरा बढ़ गया है. वहीं धीरे-धीरे पशु भी अब दम तोड़ने लगे हैं. लगातार पानी भरा रहने से आज एक गाय की मौत हो गई, जिसको स्थानीय लोगों ने बड़ी मुश्किल से पानी से निकाल कर बाहर निकाला. हालात इतने खराब थे कि गाय के कीड़े पड़ गए. लगातार पानी में रहने के चलते दवाई भी असर नहीं कर पाई और गाय ने दम तोड़ दिया. ऐसे ही हालत अन्य पशुओं के साथ हो रहे हैं. हालत इतने विकट हो गए हैं कि लोग सांप-बिच्छू के डर से घरों की छत पर बैठने को मजबूर हैं. दिन तो जैसे-तैसे काट लेते हैं, लेकिन रात काटना उनके लिए बड़ा मुश्किल हो गया है, क्योंकि कब कौन सा विषैला जानवर आ जाए, कहा नहीं जा सकता. घरों में लगातार पानी भरे रहने से ग्रामीणों को मकान गिरने का भी अंदेशा बना रहता है, जिसके चलते लोग भय के साए में जीवन जीने को मजबूर हैं. हालांकि कुछ घरों में लगातार पानी भरा रहने के चलते दरारें आने लग गई हैं. स्थानीय लोग अपनी परेशानी प्रशासन को लगातार बता रहे हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा उनकी सुनवाई नहीं की जा रही है. ऐसे ही हालत पशुओं के हैं. पशुओं के बाड़े में पानी भरा हुआ है, जिसके चलते मूक-बधिर पशु अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं. किसानों ने सेठ-साहूकार से कर्ज पर रुपए उधार लेकर फसलें बोईं, लेकिन भगवान इंद्रदेव के प्रकोप के चलते फसलें पानी की भेंट चढ़ चुकी हैं. वहीं घरों में रहना किसानों के लिए दुश्वार हो गया है. अब जाएं तो कहां जाएं?
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कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में आक्रोश
20 दिनों से लगातार अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश है. ग्रामीणों का कहना है कि अब उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे. क्योंकि प्रशासन को बताते-बताते परेशान हो चुके हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि “राम तो रूठ गया, अब राज से उम्मीद थी, लेकिन राज भी सुनवाई नहीं कर रहा है. अब अपनी पीड़ा किसको सुनाएं.”