Pratapgarh Rain: लगातार बारिश से प्रतापगढ़ जिले में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. तालाबों में बकरियां फंस गईं, पुलिया पर बहता पानी ग्रामीणों के लिए खतरा बना, खेतों की फसलें नष्ट हुईं और घरों में पानी घुसा. ग्रामीणों ने ऊंची पुलिया व मुआवजे की मांग की.
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पानी से स्कूल जाते बच्चे
पीपलखूंट ग्राम पंचायत के वार्ड संख्या-6 स्थित नाल पाड़ा में सात साल से पुलिया निर्माण का मामला अधर में लटका हुआ है. वर्ष 2018 में बनी पुलिया पहली ही बारिश में बह गई थी. ग्रामीणों का आरोप है कि उस समय घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिससे पुलिया टिक नहीं पाई. सात बरस बाद भी नई पुलिया का निर्माण नहीं हो सका है, जिससे नाले के उस पार बसे करीब 50 मकानों के लोग हर बरसात में जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं. बरसात के दिनों में नाला उफान पर आ जाता है. स्कूली बच्चे उपखंड मुख्यालय तक पहुंचने के लिए बहते पानी से गुजरने को विवश हैं. ग्रामीण बालिका पूजा बताती हैं, बारिश में स्कूल जाना बहुत मुश्किल हो जाता है, जान जोखिम में डालकर नाले को पार करना पड़ता है.
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7 साल से टूटी हुई है पुलिया
इसी तरह ग्रामीण महावीर ने कहा कि पहली ही बारिश में पुलिया टूट गई थी, तब से हर साल हमारी मुश्किलें बढ़ रही हैं. ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में बुजुर्गों और महिलाओं को नाले को पार करना बेहद कठिन हो जाता है. आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना चुनौती बन जाता है. कई बार अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दिए गए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला. ग्रामीणों ने तुरंत ऊंची और पक्की पुलिया बनाने की मांग की. ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार निवेदन करने के बावजूद अब तक केवल झूठे आश्वासन मिले हैं, जबकि किसी बड़े हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है. इस संबंध में ब्लॉक विकास अधिकारी अशोक कुमार डिंडोर ने बताया कि, यह पुराना काम है, रिकॉर्ड देखकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी. वस्तुस्थिति का जायजा लेकर नियमानुसार नई पुलिया के निर्माण की स्वीकृति जारी करेंगे.
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तालाब का बढ़ा जलस्तर
पीपलखूंट उपखंड के ग्राम पंचायत बकतोड़ में भारी बारिश के कारण तालाब का जल स्तर अचानक बढ़ गया. पानी का तेज बहाव बाईपास सड़क के पास पहुंचने से 10 बकरियां फंस गईं और ग्रामीणों में हड़कंप मच गया. ग्रामीणों ने बताया कि यहां हर बरसात में इसी तरह खतरा बना रहता है. सूरजमल मेघवंशी ने आरोप लगाया कि बाईपास का निर्माण सुरक्षित तरीके से नहीं किया गया है. इसके चलते न केवल पशुओं बल्कि विद्यार्थियों और राहगीरों तक की जान पर संकट मंडरा रहा है. कई बार शिकायतों और बैठकों के बावजूद प्रशासन ने अभी तक समाधान की दिशा में कदम नहीं उठाए.
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जान जोखिम में डाल पुल कर रहे हैं पार
इसी तरह ग्राम पंचायत ठेचला में घंटाली से अरनोद को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर बनी रपट पुलिया बारिश के दौरान खतरनाक साबित हो रही है. रविवार को तेज बारिश में पुल पर पानी आ जाने से एक मरीज को इलाज के लिए ले जा रही मोटरसाइकिल तेज बहाव में फंस गई और नाले में बह गई. हालांकि ग्रामीणों की तत्परता से मरीज और बाइक सवारों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन यह घटना बड़ा हादसा बनने से बची. ग्रामीण मुकेश निनामा ने बताया कि करीब 40 गांवों की 50 हजार की आबादी इस समस्या से जूझ रही है. लोग मजबूरी में जान जोखिम में डालकर पुल पार करते हैं. ग्रामीणों ने मांग की है कि यहां ऊंची पक्की पुलिया का निर्माण शीघ्र कराया जाए, ताकि आपात स्थिति में परेशानी से राहत मिल सके. ग्रामीणों का कहना है कि बकतोड़ हो या ठेचला, दोनों ही जगह बरसात में हालात खतरनाक हो जाते हैं. आज नुकसान बकरियों और मोटरसाइकिल तक सीमित रहा, लेकिन यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में किसी बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता.
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फसलें हो गई हैं नष्ट
पीपलखूंट क्षेत्र में पिछले दो दिनों से जारी भारी बारिश ने किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. डूंगलवानी सहित आसपास के गांवों में नदी-नाले उफान पर बह रहे हैं. ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के कारण मक्का, सोयाबीन व अन्य खरीफ फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं. किसानों ने प्रशासन से खेतों का सर्वे करवाकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है.
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घरों में घुसा पानी
वहीं, अरनोद क्षेत्र के चुपना गांव में रविवार को हुई बरसात के बाद हालात बिगड़ गए. निचले इलाकों में पानी भर जाने से कई घरों में पानी घुस गया, जिससे ग्रामीणों का घरेलू सामान भीग गया और लोगों को रातभर भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. ग्रामीण चैनराम मीणा ने बताया कि जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से हर साल बरसात में यही स्थिति बनती है. इस बार हालात और भी खराब हो गए हैं.