What Is ToD Tariff: केंद्र सरकार ने बिजली नियमों में बदलाव कर TOD टैरिफ लागू किया है, जिसमें दिन और रात की बिजली के अलग रेट होंगे. देश में तेज़ी से स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं और अगले 18 महीनों में राजस्थान के सभी घर कवर होंगे. दिन में सस्ती और रात में महंगी बिजली का सिस्टम लागू होगा.
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Rajasthan ToD Tariffs
केंद्र सरकार ने विद्युत (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम, 2020 में बदलाव करते हुए एक नई व्यवस्था जोड़ दी है. इस संशोधन के साथ ‘टाइम ऑफ डे’ यानी TOD टैरिफ को लागू किया जा रहा है. इसका मतलब यह है कि अब उपभोक्ताओं को दिन और रात की बिजली के लिए अलग-अलग रेट पर बिल चुकाना होगा. जयपुर में प्रवासी राजस्थानी दिवस के दौरान स्मार्ट मीटर बनाने वाली कंपनी जीनस पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के ज्वाइंट डायरेक्टर जितेंद्र कुमार अग्रवाल ने बताया कि यह सिस्टम आने वाले समय में बिजली खपत और बिलिंग की दिशा पूरी तरह बदल देगा.
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आरडीएसएस योजना के तहत केंद्र सरकार देशभर में बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटर लगाने का काम कर रही है. अभी तक 20 करोड़ मीटर स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से नवंबर 2025 तक 3.15 करोड़ मीटर फिट हो चुके थे. आरडीएसएस और अन्य योजनाओं को जोड़ें तो 15 नवंबर 2025 तक कुल 4.76 करोड़ स्मार्ट मीटर इंस्टॉल किए जा चुके थे. आने वाले कुछ वर्षों में लगभग 25 से 26 करोड़ मीटर लगाने का लक्ष्य है ताकि सभी बिजली कनेक्शन स्मार्ट मीटर से जुड़ जाएं. कृषि कनेक्शन अभी इस प्रक्रिया से अलग रखे गए हैं क्योंकि उनका ढांचा अलग तरीके से चलता है.
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अग्रवाल ने बताया कि उनकी कंपनी अब तक राजस्थान में करीब 20 से 22 लाख स्मार्ट मीटर लगा चुकी है. उनके अनुसार अगले एक से डेढ़ साल, यानी लगभग 18 महीने में राज्य के हर घर में स्मार्ट मीटर लगाने का काम पूरा हो जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि मीटर लगते ही उपभोक्ताओं को कई तरह की सुविधाएँ मिलने लगती हैं, जिससे उन्हें अपनी बिजली खपत पर ज्यादा नियंत्रण मिलता है.
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स्मार्ट मीटर से उपभोक्ता को सबसे बड़ा लाभ यह मिलता है कि वे अपने घर में चल रहे हर उपकरण की बिजली खपत को मोबाइल ऐप पर देख सकते हैं. हर 15 मिनट में डेटा अपडेट होता है, जिससे यह पता चलता रहता है कि कौन सा उपकरण कितना लोड ले रहा है. इससे पेनल्टी से बचने और बिजली की बचत का बेहतर प्लान बनाने में मदद मिलती है. उपभोक्ता अपने मासिक खर्च का अंदाजा पहले ही लगा लेते हैं, जिससे बजट बनाना आसान हो जाता है.
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ऊर्जा मंत्रालय के नोटिफिकेशन में बताया गया कि नया TOD टैरिफ स्थिर रहेगा. इस व्यवस्था के तहत दिन में ‘सोलर आवर्स’ के दौरान लगभग 8 घंटे बिजली बिल सामान्य दर से 20% तक कम हो सकता है. वहीं रात के समय, जब मांग बढ़ जाती है, उपभोक्ताओं को 10% अधिक दर पर बिल देना होगा. औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं को पीक टाइम में 20% तक अधिक भुगतान करना पड़ेगा.
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सरकार ने तय किया है कि जिन औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं की बिजली मांग 10 किलोवॉट या उससे अधिक है, उनके लिए यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2024 से लागू हो चुकी है. बाकी सभी उपभोक्ताओं के लिए यह सिस्टम 1 अप्रैल 2025 तक लागू कर दिया जाएगा. हालांकि कृषि उपभोक्ता अभी इस व्यवस्था से बाहर रहेंगे.
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नए टैरिफ सिस्टम को लागू करने के लिए स्मार्ट मीटर का होना जरूरी माना गया है. जिन लोगों के यहां पहले से स्मार्ट मीटर लगा है, वहां यह सिस्टम सबसे पहले लागू होगा. मंत्रालय ने बताया कि अधिकांश राज्य नियामक आयोग बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक वर्ग में पहले ही TOD टैरिफ लागू कर चुके हैं. साथ ही कंपनियों को यह भी अनिवार्य किया गया है कि किसी भी टैरिफ बदलाव की जानकारी उपभोक्ताओं को कम से कम 30 दिन पहले देना होगी.
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दिन और रात के बिजली रेट में अंतर का बड़ा कारण उत्पादन लागत है. दिन के समय सप्लाई में सौर ऊर्जा शामिल होती है, जो सस्ती पड़ती है. जबकि रात को उत्पादन केवल कोयला और गैस आधारित प्लांटों से होता है, जिसकी लागत अधिक होती है. इस वजह से रात की बिजली महंगी होगी. केंद्र सरकार का मानना है कि TOD सिस्टम से लोग पीक टाइम में बिजली कम खर्च करेंगे, जिससे ग्रिड पर लोड घटेगा और रख-रखाव में भी बचत होगी. कुल मिलाकर यह सिस्टम उपभोक्ता और सप्लाई दोनों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है.